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बसपा सुप्रीमो मायावती (Source: Google)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की सियासत में 14 अप्रैल का दिन बेहद अहम होने जा रहा है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इस दिन बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती को एक विशाल शक्ति प्रदर्शन के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है। लखनऊ में होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम की कमान स्वयं बसपा सुप्रीमो मायावती संभालेंगी, जहां पूरे प्रदेश से पार्टी कार्यकर्ताओं और दिग्गजों का जमावड़ा लगेगा।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण राजनीतिक मौके पर एक बड़ी खबर यह है कि मायावती के उत्तराधिकारी माने जा रहे आकाश आनंद लखनऊ के इस मुख्य शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा नहीं होंगे, जिससे सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
बसपा के इस बड़े कार्यक्रम के बीच आकाश आनंद की अनुपस्थिति का कारण उनका पूर्व-निर्धारित छत्तीसगढ़ दौरा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जिस समय लखनऊ में बसपा अपना दम खम दिखा रही होगी, उस समय आकाश आनंद रायपुर में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे होंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मायावती की यह रणनीतिक खामोशी और आकाश आनंद को दूसरे राज्य की जिम्मेदारी सौंपना किसी बड़े दूरगामी बदलाव का संकेत हो सकता है। फिलहाल सस्पेंस इस बात पर भी बरकरार है कि क्या मायावती इस मंच से कोई आक्रामक चुनावी बिगुल फूंकेंगी या फिर उनकी चुप्पी आने वाले समय के लिए किसी नई बिसात की तैयारी है।
यूपी के इस महामुकाबले में भाजपा और बसपा तीनों ही दल अपने-अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने और नए समीकरण बनाने में जुटे हैं। जहां सत्ताधारी भाजपा अपनी संगठनात्मक मजबूती और सरकारी योजनाओं के भरोसे है, वहीं बसपा के लिए यह समय अपने राजनीतिक अस्तित्व और दलित वोट बैंक को बचाने की एक बड़ी परीक्षा है।
14 अप्रैल को लखनऊ के मंच से निकलने वाला मायावती का संदेश यह तय करेगा कि प्रदेश का दलित मतदाता आने वाले समय में किस दिशा में जाएगा। यह शक्ति प्रदर्शन न केवल वर्तमान की स्थिति स्पष्ट करेगा बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
Location : Lucknow
Published : 3 April 2026, 3:32 PM IST