Ukraine to Deoria: जिस बेटे के लौटने की थी उम्मीद, अब घर आ रहा उसका पार्थिव शरीर… रुला देगी देवरिया के अभिषेक की कहानी

देवरिया के अभिषेक निषाद के परिवार का लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ओडेसा बंदरगाह क्षेत्र में बमबारी में घायल हुए अभिषेक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 18 August 2026, 1:23 PM IST
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Deoria: यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध के दौरान रूस की 19 जुलाई के बमबारी में घायल हुए देवरिया के अभिषेक निषाद उम्र 22 वर्ष का पार्थिव शरीर अब भारत लाया जा रहा है। अभिषेक यूक्रेन में भारतीय मर्चेंट नेवी मे नाविक के पद पर चालक के पद पर कार्यरत थे। 19 जुलाई को रूस की ओर से की गई बमबारी के दौरान वह ओडेसा बंदरगाह क्षेत्र में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद उनका यूक्रेन में इलाज चल रहा था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार, हमले के बाद अभिषेक को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद वह ठीक होकर वापस लौटेंगे, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद से ही परिजन उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।

लंबे इंतजार के बाद मिली भारत लाने की अनुमति

अभिषेक के निधन के बाद सबसे बड़ी चिंता उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने की थी। परिवार की ओर से संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा था। काफी कोशिशों के बाद अब यूक्रेन सरकार ने पार्थिव शरीर को भारत भेजने की अनुमति दे दी है। बताया जा रहा है कि विदेश मंत्रालय की पहल के बाद शव को भारत लाने का रास्ता साफ हुआ। अब अभिषेक का पार्थिव शरीर अगले दो-तीन दिनों के भीतर यूक्रेन से दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। दिल्ली एयरपोर्ट से परिजन उसे लेकर देवरिया स्थित गांव पहुंचेंगे।

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रिश्तेदार लेकर आएंगे पार्थिव शरीर

अभिषेक के घर में एक तरफ बेटे के लौटने का इंतजार है तो दूसरी तरफ उनके पिता की तबीयत अचानक खराब हो गई है। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वह दिल्ली एयरपोर्ट नहीं जा पाएंगे। ऐसे में परिवार के रिश्तेदार अजय और राजकुमार दिल्ली पहुंचेंगे। दोनों एयरपोर्ट से अभिषेक के पार्थिव शरीर को लेकर गांव आएंगे। इसके बाद परिवार की ओर से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

अंतिम दर्शन के लिए गांव को भी इंतजार

अभिषेक की मौत की खबर से परिवार के साथ पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों के लिए सबसे मुश्किल समय वह रहा, जब उन्हें बेटे के निधन की जानकारी तो मिल गई, लेकिन अंतिम दर्शन के लिए उसका पार्थिव शरीर भारत नहीं आ पा रहा था। लंबे इंतजार के बाद अब अनुमति मिलने से परिवार को उम्मीद जगी है कि वे अभिषेक को अंतिम विदाई दे सकेंगे। गांव के लोग भी उनके पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे हैं।

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युद्ध क्षेत्र में नौकरी ने बदल दी परिवार की जिंदगी

अभिषेक की उम्र अभी महज 22 वर्ष थी। मर्चेंट नेवी में नौकरी करते हुए वह अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुई बमबारी ने उनके परिवार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।अब परिवार की नजर दिल्ली एयरपोर्ट पर है, जहां से अभिषेक का पार्थिव शरीर गांव लाया जाएगा। इसके बाद अंतिम संस्कार के साथ परिवार उस बेटे को अंतिम विदाई देगा, जिसके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लंबे समय तक बनी रही।

Location :  Deoria

Published :  18 August 2026, 1:23 PM IST

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