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प्रतीकात्मक छवि (Img: Pinterest)
Agra: उत्तर प्रदेश के जनपद आगरा में रिश्तेदार के व्हाट्सएप नंबर से आरटीओ चालान के नाम पर भेजी गई एक संदिग्ध APK फाइल खोलना एक कारोबारी को भारी पड़ गया। मोबाइल हैक कर साइबर ठगों ने नेट बैंकिंग के जरिए कारोबारी के खाते से 9.61 लाख रुपये उड़ा लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कचहरी घाट निवासी आटा-मैदा कारोबारी दिनेश अग्रवाल का मोतीगंज में थोक कारोबार है। कारोबारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उनके एक रिश्तेदार के मोबाइल नंबर से WhatsApp पर RTO चालान के नाम से एक APK फाइल भेजी गई। रिश्तेदार के नंबर से फाइल आने के कारण उन्हें कोई खास शक नहीं हुआ। उन्होंने फाइल खोलने की कोशिश की, लेकिन वह खुल नहीं सकी। इसके बाद वह अपने कारोबार के काम में व्यस्त हो गए।
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करीब चार घंटे बाद दोपहर 3 बजे कारोबारी के मोबाइल पर लगातार बैंकिंग ट्रांजेक्शन के मैसेज आने लगे। उन्हें पता चला कि उनके खाते से UPI के जरिए करीब 4 लाख रुपये निकल चुके हैं। अचानक खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने की जानकारी मिलते ही कारोबारी परेशान हो गए। उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क कर मामले की जानकारी दी। शुरुआती राहत यह रही कि साइबर ठगों ने जिन खातों में रकम भेजी थी, तकनीकी वजह से उस समय रकम रिसीव नहीं हो सकी और वापस घूमकर कारोबारी के खाते में आ गई।
कारोबारी को जब तक यह समझ आता कि उनके साथ क्या हुआ है, तब तक साइबर ठगों ने अपना तरीका बदल दिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने नेट बैंकिंग के जरिए रकम ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। खाता ब्लॉक होने या पुलिस तक मामला पहुंचने से पहले ही पांच अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 9.61 लाख रुपये दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। बताया गया कि ठगों ने करीब 13 लाख रुपये इधर-उधर करने की कोशिश की। इनमें से करीब 9.61 लाख रुपये दूसरे खातों तक पहुंच गए।
घटना के बाद कारोबारी ने तुरंत साइबर अपराध की हेल्पलाइन 1930 पर फोन कर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाना छत्ता और शनिवार सुबह साइबर क्राइम पुलिस को भी लिखित शिकायत दी गई। पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें रकम ट्रांसफर की गई है।
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह के मुताबिक, शुरुआती जांच में आशंका है कि पहले कारोबारी के रिश्तेदार का मोबाइल हैक किया गया। इसके बाद उसी नंबर से APK फाइल भेजकर कारोबारी के मोबाइल को साइबर अपराधियों ने अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की। डीसीपी ने बताया कि रकम जिन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई है, उनकी जांच की जा रही है। पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंचने के लिए बैंकिंग ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि WhatsApp या किसी अन्य माध्यम से आने वाली संदिग्ध APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। खासतौर पर अगर फाइल किसी परिचित या रिश्तेदार के नंबर से आई हो, तब भी पहले फोन करके इसकी पुष्टि कर लें। साइबर ठगी से बचने के लिए किसी भी संदिग्ध लिंक, फाइल या ऐप को खोलने से पहले उसकी जांच करना जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही बैंक खाते में जमा वर्षों की कमाई को खतरे में डाल सकती है।
Location : Agra
Published : 4 October 2026, 5:53 PM IST