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चंबल में 400 से ज्यादा घड़ियालों का जन्म (Img: Google)
New Delhi: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में घड़ियाल संरक्षण अभियान इस वर्ष बड़ी सफलता लेकर सामने आया है। लगातार निगरानी, सुरक्षा और वैज्ञानिक संरक्षण उपायों के चलते नदी में घड़ियालों की नई पीढ़ी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2026-27 में चंबल नदी के विभिन्न नेस्टिंग स्थलों पर कुल 1752 घड़ियाल शावक अंडों से निकलकर जीवन में आए हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 440 अधिक है, जिससे संरक्षण कार्यों की प्रभावशीलता स्पष्ट दिखाई देती है।
वर्ष 2025-26 में जहां 1312 घड़ियाल शावक दर्ज किए गए थे, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 1752 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि चंबल नदी के बेहतर पारिस्थितिक संतुलन और लगातार चल रहे संरक्षण प्रयासों का परिणाम है। वन्यजीव विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी केवल संख्या नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती का संकेत है।
वन्यजीव प्रभाग की डीएफओ चांदनी सिंह ने बताया कि इस सफलता के पीछे लगातार की गई निगरानी और घड़ियालों के प्राकृतिक प्रजनन स्थलों की सुरक्षा मुख्य कारण है। अंडों को सुरक्षित रखने, शिकारियों से बचाव और संवेदनशील क्षेत्रों में मानव हस्तक्षेप को सीमित करने जैसे कदमों ने प्रजनन दर को बेहतर बनाया है।
इस वर्ष संरक्षण कार्यक्रम के तहत 516 घड़ियाल अंडों को लखनऊ स्थित कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र भेजा गया है। यहां इन अंडों का वैज्ञानिक तरीके से ऊष्मायन किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नवजात घड़ियालों की जीवित रहने की दर को बढ़ाना और भविष्य में नदी में उनकी आबादी को और मजबूत करना है।
चंबल नदी को भारत में घड़ियालों का सबसे सुरक्षित और महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास माना जाता है। यहां घड़ियालों के साथ-साथ गंगा डॉल्फिन, दुर्लभ कछुए और कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं। घड़ियालों की बढ़ती संख्या यह भी संकेत देती है कि नदी का पर्यावरणीय संतुलन धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही प्रयास लगातार जारी रहे तो आने वाले वर्षों में चंबल में घड़ियालों की संख्या और अधिक बढ़ सकती है। यह न केवल जैव विविधता के लिए बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।
Location : New Delhi
Published : 13 June 2026, 2:52 PM IST