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अल-नीनो फोटो सोर्स-डाइनामाइट न्यूज
New Delhi: भारत में मानसून की रफ्तार भले ही सामान्य दिख रही हो, लेकिन अल-नीनो ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। वजह है, प्रशांत महासागर में सक्रिय हुआ अल-नीनो। भारतीय मौसम विभाग यानी IMD ने भी अल-नीनो के प्रभाव की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। सवाल ये है कि क्या अल-नीनो इस साल बारिश पर ब्रेक लगाएगा या इसके प्रभाव से कम बारिश होगी? क्या किसानों और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? आइए समझते हैं ..
हवा के पैटर्न में भी बदलाव
IMD के मुताबिक, प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय इलाके में समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ गया है। यही स्थिति अल-नीनो कहलाती है। सिर्फ समुद्र ही नहीं, बल्कि हवा के पैटर्न में भी बदलाव दिख रहा है, जो इसके और मजबूत होने का संकेत है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले जापान मौसम विज्ञान एजेंसी भी अल-नीनो को लेकर चेतावनी दे चुकी थी।
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अल-नीनो का असर
मौसम विभाग ने पहले ही इस साल मानसून के अनुमान को घटा दिया था। अप्रैल में जहां सामान्य बारिश का अनुमान 92 फीसदी था, वहीं अब इसे घटाकर 90 फीसदी कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दूसरे हिस्से यानी जुलाई से सितंबर के बीच अल-नीनो का असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।
कुछ इलाकों में लू की स्थिति
हालांकि राहत की बात यह है कि मानसून फिलहाल अपनी सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कई हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। लेकिन दूसरी तरफ राजस्थान, तेलंगाना, विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में लू की स्थिति बनी रह सकती है।
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अल-नीनो क्या है?
सरल शब्दों में कहें तो जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, तो दुनिया भर के मौसम पर इसका असर पड़ता है। भारत में अक्सर अल-नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ने और बारिश कम होने की आशंका बढ़ जाती है।
Location : New Delhi
Published : 13 June 2026, 2:41 PM IST
Topics : El Nino IMD Alert Monsoon 2026 Weather Update