AI Nino Impact: अल-नीनो की दस्तक से बड़ा खतरा, कम होगी बारिश या पड़ेगा सूखा? जानिये मौसम और भारत पर इसका प्रभाव

भारत में मानसून की रफ्तार भले ही सामान्य दिख रही हो, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है। वजह है प्रशांत महासागर में सक्रिय हुआ अल-नीनो, जिसकी आधिकारिक पुष्टि अब भारतीय मौसम विभाग यानी IMD ने भी कर दी है।

Updated : 13 June 2026, 5:51 PM IST
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New Delhi: भारत में मानसून की रफ्तार भले ही सामान्य दिख रही हो, लेकिन EI Nino ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। वजह है, प्रशांत महासागर में सक्रिय हुआ अल-नीनो। भारतीय मौसम विभाग यानी IMD ने भी अल-नीनो के प्रभाव की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। सवाल ये है कि क्या अल-नीनो इस साल बारिश पर ब्रेक लगाएगा या इसके प्रभाव से कम बारिश होगी? क्या किसानों और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? आइए समझते हैं ..

हवा के पैटर्न में भी बदलाव

IMD  के मुताबिक, प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय इलाके में समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ गया है। यही स्थिति EI Nino कहलाती है। सिर्फ समुद्र ही नहीं, बल्कि हवा के पैटर्न में भी बदलाव दिख रहा है, जो इसके और मजबूत होने का संकेत है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले जापान मौसम विज्ञान एजेंसी भी EI Nino को लेकर चेतावनी दे चुकी थी।

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EI Nino का असर

मौसम विभाग ने पहले ही इस साल मानसून के अनुमान को घटा दिया था। अप्रैल में जहां सामान्य बारिश का अनुमान 92 फीसदी था, वहीं अब इसे घटाकर 90 फीसदी कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दूसरे हिस्से यानी जुलाई से सितंबर के बीच EI Nino का असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।

कुछ इलाकों में लू की स्थिति

हालांकि राहत की बात यह है कि मानसून फिलहाल अपनी सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कई हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। लेकिन दूसरी तरफ राजस्थान, तेलंगाना, विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में लू की स्थिति बनी रह सकती है।

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EI Nino क्या है?

सरल शब्दों में कहें तो जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, तो दुनिया भर के मौसम पर इसका असर पड़ता है। भारत में अक्सर EI Ninoके दौरान मानसून कमजोर पड़ने और बारिश कम होने की आशंका बढ़ जाती है।

Location :  New Delhi

Published :  13 June 2026, 2:41 PM IST

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