Russia-Ukraine War: रूस भेजे गए भारतीयों के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, पीड़ित परिवारों को राहत देने के आदेश

रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए, घायल और लापता भारतीय नागरिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने विदेश मंत्रालय को नोडल अधिकारी नियुक्त करने, डीएनए मिलान कराने, मुआवजा प्रक्रिया में सहायता देने और पीड़ित परिवारों को उनकी भाषा में जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 31 July 2026, 4:36 PM IST
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New Delhi: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नौकरी का झांसा देकर रूस भेजे गए भारतीय नागरिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि युद्ध में मारे गए, घायल हुए और अब भी लापता भारतीयों के परिवार लंबे समय से मानसिक, आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इन परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराए। सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करने, डीएनए जांच कराने, मुआवजा प्रक्रिया में मदद देने और पीड़ित परिवारों को उनकी मातृभाषा में जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

विदेश मंत्रालय नियुक्त करेगा नोडल अधिकारी

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश Surya Kant, न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi और न्यायमूर्ति V. Mohan की पीठ ने कहा कि विदेश मंत्रालय एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करे। यह अधिकारी युद्ध प्रभावित भारतीयों के परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखेगा और उन्हें मामले से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, सरकारी सहायता और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में समय-समय पर अवगत कराएगा।

डीएनए जांच से होगी मृतकों की पहचान

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि युद्ध में मारे गए भारतीय नागरिकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए सैंपल का मिलान कराया जाए। अदालत का मानना है कि इससे मृतकों की सही पहचान कर उनके पार्थिव शरीर परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में मदद मिलेगी।

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मुआवजा दिलाने में भी करेगी मदद

अदालत ने विदेश मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया कि वह नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास के समक्ष मुआवजा दावा (क्लेम) दाखिल कराने में पीड़ित परिवारों की सहायता करे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि परिवारों को पूरी प्रक्रिया उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में समझाई जाए, ताकि भाषा की वजह से उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

NALSA और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण देंगे मुफ्त सहायता

सुप्रीम कोर्ट ने National Legal Services Authority> (NALSA) और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों को भी निर्देश दिया है कि वे पीड़ित परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराएं। इस सहायता में मुआवजा क्लेम दाखिल करना, जरूरी दस्तावेज तैयार कराना, कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी कराना और पार्थिव शरीर को भारत लाने से जुड़ी प्रक्रियाओं में सहयोग शामिल होगा।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला उन भारतीय युवाओं से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर ट्रैवल एजेंटों ने रूस में अच्छी नौकरी का झांसा देकर भेजा था। परिवारों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद कई युवाओं को उनकी इच्छा के खिलाफ रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। इस दौरान कई भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, कुछ घायल हुए और कई अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके बाद पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सरकार से अपने परिजनों का पता लगाने, मृतकों के पार्थिव शरीर भारत लाने तथा रूसी सरकार से उचित मुआवजा दिलाने की मांग की।

'परिवारों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए'

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले से ही दुख और संकट झेल रहे परिवारों को अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार का दायित्व केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को पूरी प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग देना भी है।

Location :  New Delhi

Published :  31 July 2026, 4:36 PM IST

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