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नेत्रहीन श्रद्धालु की अटूट आस्था ने जीता लोगों का दिल (Img: Dynamite News)
Muzaffarnagar: कांवड़ यात्रा में हर साल लाखों शिवभक्त शामिल होते हैं, लेकिन इस बार मुजफ्फरनगर पहुंचे एक नेत्रहीन कांवड़िए ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आंखों की रोशनी बचपन से नहीं है, लेकिन भगवान शिव के प्रति ऐसी अटूट आस्था है कि वह लगातार 17वीं बार हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गांव पहुंचे हैं। लाठी के सहारे अकेले यात्रा करने वाले इस शिवभक्त की कहानी सुनकर लोग उनकी हिम्मत और विश्वास को सलाम कर रहे हैं।
मुजफ्फरनगर के बिटावदा गांव निवासी सत्येंद्र जन्म से ही नेत्रहीन हैं। दुनिया की रोशनी भले ही उन्होंने कभी नहीं देखी, लेकिन उनकी आस्था कभी कमजोर नहीं हुई। हर साल सावन में वह हरिद्वार पहुंचते हैं और गंगाजल लेकर पैदल अपने गांव तक कांवड़ यात्रा पूरी करते हैं। इस बार भी उन्होंने 2 अगस्त को हरिद्वार के हर की पौड़ी से गंगाजल उठाया और तीन दिन की यात्रा पूरी कर अपने गंतव्य तक पहुंच गए।
सत्येंद्र बताते हैं कि वह पूरी यात्रा अकेले ही शुरू करते हैं। उनके हाथ में सिर्फ एक लाठी होती है, जो रास्ता पहचानने का सहारा बनती है। हालांकि यात्रा के दौरान मिलने वाले दूसरे कांवड़िए समय-समय पर उनका हाथ पकड़कर सही रास्ता दिखा देते हैं। उनका कहना है कि उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह अकेले हैं। रास्ते में मिलने वाले शिवभक्त परिवार की तरह मदद करते हैं और यही सहयोग उन्हें मंजिल तक पहुंचा देता है।
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सत्येंद्र पिछले 17 वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह उनकी 17वीं कांवड़ है और जब तक शरीर साथ देगा, वह यह यात्रा जारी रखेंगे। उनके अनुसार, वह भगवान भोलेनाथ से धन-दौलत नहीं मांगते। उनकी सिर्फ यही प्रार्थना है कि जीवन में सुख-शांति बनी रहे और उनके पिछले जन्म के पापों का नाश हो जाए।
सत्येंद्र का कहना है कि यात्रा के दौरान कई बार कठिन परिस्थितियां आती हैं, लेकिन उन्हें हमेशा ऐसा महसूस होता है कि भगवान शिव स्वयं उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मुझे आंखों से नहीं दिखता, लेकिन विश्वास है कि भोलेनाथ हमेशा मेरे साथ चलते हैं। मैं अकेला निकलता हूं, मगर रास्ते में मिलने वाले शिवभक्त मेरा हाथ पकड़ लेते हैं। यही मेरे लिए भगवान का आशीर्वाद है।"
मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद सत्येंद्र की कहानी सुनकर कई श्रद्धालु भावुक हो गए। लोगों का कहना है कि जहां कई लोग छोटी-छोटी परेशानियों में हिम्मत हार जाते हैं, वहीं सत्येंद्र बिना आंखों की रोशनी के भी हर साल इतनी लंबी पैदल यात्रा पूरी कर रहे हैं।
Location : Muzaffarnagar
Published : 6 August 2026, 7:14 PM IST