फर्जी डिग्री कांड में बड़ा खुलासा: नोएडा-हापुड़-अलीगढ़ के पूर्व कर्मचारियों की तलाश, कई राज्यों में पहुंची पुलिस

कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले गिरोह के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में एनसीआर के एक निजी विश्वविद्यालय के तीन पूर्व कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें नोएडा, हापुड़ और अलीगढ़ भेजी गई हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 15 March 2026, 5:33 AM IST
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Noida: फर्जी डिग्री और मार्कशीट का बड़ा खेल उजागर होने के बाद अब जांच की आंच कई राज्यों तक पहुंच गई है। पुलिस को जांच में ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि इस गिरोह का नेटवर्क काफी व्यापक था। नौ राज्यों के 14 नामी विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्री तैयार करने वाले गिरोह के तार अब एनसीआर के कुछ पूर्व कर्मचारियों से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने इन लोगों की तलाश तेज कर दी है और अलग-अलग राज्यों में टीमें भेजी गई हैं।

तीन पूर्व कर्मचारी जांच के घेरे में

पुलिस के अनुसार जेल भेजे गए बिचौलिए विनीत राय से पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। उसने बताया कि एनसीआर के एक निजी विश्वविद्यालय के तीन पूर्व कर्मचारियों से उसका संपर्क था। ये लोग नोएडा, हापुड़ और अलीगढ़ के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इनकी भूमिका की जांच के लिए पुलिस की तीन टीमें संबंधित शहरों के लिए रवाना हो चुकी हैं। टीमें इन संदिग्धों के बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य लेनदेन की जानकारी जुटा रही हैं।

कई राज्यों में दस्तावेजों की जांच

जांच के दौरान पुलिस की कुछ टीमें अन्य राज्यों में भी भेजी गई हैं। ये टीमें झारखंड, मणिपुर और सिक्किम के संबंधित विश्वविद्यालयों में जाकर दस्तावेजों का सत्यापन कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी डिग्री किस स्तर तक तैयार और इस्तेमाल की गईं।

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छापेमारी में खुला था बड़ा फर्जीवाड़ा

दरअसल, किदवई नगर पुलिस थाना की पुलिस ने 18 फरवरी को जूही गोशाला चौराहा स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारकर इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया था। छापेमारी के दौरान पुलिस को 14 विश्वविद्यालयों और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की एक हजार से अधिक मार्कशीट और डिग्रियां बरामद हुई थीं। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी जैसे कई कोर्स की डिग्रियां शामिल थीं।

चार आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल

इस मामले में पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा समेत उसके साथियों नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि यह गिरोह साल 2012 से फर्जी डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अंकपत्र तैयार करने का काम कर रहा था।

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SIT कर रही है गहराई से जांच

एसआईटी प्रभारी योगेश कुमार ने बताया कि पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। पूछताछ में सामने आए सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। साथ ही विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों में जाकर दस्तावेजों की जांच और संबंधित कर्मचारियों की संलिप्तता भी खंगाली जा रही है।

Location : 
  • Noida

Published : 
  • 15 March 2026, 5:33 AM IST

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