चंपत राय और अनिल मिश्रा की विदाई इतनी आसान नहीं! पद से हटने के लिए चाहिए दो-तिहाई बहुमत, जानें क्या है ट्रस्ट का नियम

अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी मामले के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, पद से हटने के लिए उन्हें ट्रस्ट में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जिसका फैसला 6 जुलाई को होने वाली बैठक में मतदान से होगा।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 2 July 2026, 12:25 PM IST
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Ayodhya: अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले में एसआईटी (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की है और अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस बड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से भी कड़ी पूछताछ हुई है।

इस पूछताछ के बाद दोनों ही बड़े पदाधिकारियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने-अपने पदों से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। हालांकि, वे तुरंत अपने पद से मुक्त नहीं हो सकते, क्योंकि ट्रस्ट के नियमों के अनुसार उनकी विदाई की राह काफी पेचीदा है।

कैसे हटेंगे चंपत राय-अनिल मिश्रा?

राम मंदिर ट्रस्ट के बायलॉज (नियमों) के मुताबिक, किसी भी पदाधिकारी का इस्तीफा केवल सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके लिए ट्रस्टी बोर्ड में 'दो-तिहाई बहुमत' होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। वर्तमान में ट्रस्ट के कुल 14 सदस्यों में से चंपत राय और अनिल मिश्रा इस्तीफा दे चुके हैं, जिसके बाद बचे हुए 12 सदस्यों की राय बेहद अहम हो गई है।

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आगामी 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की संभावित बैठक में इस मुद्दे पर बकायदा वोटिंग (मतदान) कराई जाएगी। जब तक ट्रस्ट के दो-तिहाई सदस्य इस्तीफे के पक्ष में वोट नहीं करेंगे, तब तक दोनों अपने पदों पर बने रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि अगर इस्तीफा स्वीकार हो भी जाता है, तो चंपत राय सिर्फ महासचिव का पद छोड़ेंगे, लेकिन वे ट्रस्ट के सदस्य के रूप में हमेशा बने रहेंगे।

6 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें

आगामी 6 जुलाई को होने वाली इस आपात बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। इस बैठक में चंदा चोरी के बाद उपजे हालातों पर मंथन होने के साथ-साथ दोनों नेताओं के भविष्य पर अंतिम फैसला होगा। आपको बता दें कि इससे पहले ट्रस्ट की ऐसी महत्वपूर्ण बैठक रामलला की मूर्ति चयन के समय हुई थी।

उस समय भी नियमों के अनुसार मतदान कराया गया था और दो-तिहाई बहुमत से ही मूर्तिकार अरुण योगीराज की बनाई प्रतिमा को फाइनल किया गया था। इस बार होने वाली वोटिंग में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती और गोविंद देव गिरि जैसे बड़े संतों के रुख पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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क्या हैं ट्रस्ट के वोटिंग नियम और संचालन के कानूनी अधिकार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नियमों के अनुसार, हर किसी को बैठक में वोट देने का अधिकार नहीं है। ट्रस्ट के बायलॉज बताते हैं कि केवल सीरियल नंबर 1 से 10 तक के मुख्य ट्रस्टी और 'निर्मोही अखाड़ा' का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य को ही मत देने का अधिकार प्राप्त है।

इसके अलावा, बैठक में संघ के भैयाजी जोशी और विहिप के दिनेश चंद्र जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी आमंत्रित किए जाने की उम्मीद है। यदि बोर्ड इन आमंत्रित सदस्यों को वोटिंग का अधिकार देता है, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूर कराने या खारिज कराने में इनकी भूमिका सबसे बड़ी और निर्णायक साबित हो सकती है।

Location :  Ayodhya

Published :  2 July 2026, 12:25 PM IST

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