राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT जांच में ‘अंदरूनी खेल’ का पर्दाफाश, मानकों की उड़ी धज्जियां; अनिल मिश्रा और बैंक पर गंभीर आरोप

अयोध्या राम मंदिर के वीआईपी परिसर में वहां सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गईं, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। नियमों में ढील देकर अंदर ही अंदर जो खेल रचा गया, उसकी गूंज अब अदालतों तक पहुंच चुकी है। बड़े-बड़े पदों पर बैठे रसूखदार अब आमने-सामने हैं। इस बार क्या बड़ा खुलासा हुआ है पढ़ें स्टोरी में...

Updated : 8 July 2026, 11:22 AM IST
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Ayodhya: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी और गबन का मामला लगातार गहराता जा रहा है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की तफ्तीश में हर दिन ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जिसने मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक इस पूरी साजिश के पीछे ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ अनिल मिश्रा द्वारा नियमों में दी गई ढील और बैंक कर्मियों की मिलीभगत के पुख्ता सुबूत मिले हैं। वहीं, ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सीधे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और अनिल मिश्रा को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

अनिल मिश्रा ने बदले नियम; बायोमीट्रिक और तलाशी में दी ढील

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि राम मंदिर में वित्तीय मामलों, नकदी के संकलन और चढ़ावे की गणना की पूरी जिम्मेदारी ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के पास थी। बैंक के साथ मिलकर जो सुरक्षा प्रोटोकॉल तय किए गए थे, उनमें ट्रस्ट की तरफ से अनिल मिश्रा ही शामिल थे।

जांच के मुताबिक, गणनाकर्मियों की सुरक्षा को लेकर तय किए गए बेहद कड़े मानकों को अनिल मिश्रा ने अपने स्तर पर शिथिल (कमजोर) कर दिया था। गणनाकर्मियों की पोशाक (ड्रेस), बायोमीट्रिक हाजिरी और गहन तलाशी जैसे अनिवार्य सुरक्षा चक्रों को दरकिनार कर दिया गया, जिससे चोरों को आसानी से वारदात को अंजाम देने का मौका मिल गया। इस गंभीर लापरवाही को लेकर अब अनिल मिश्रा पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

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चंपत राय का फूटा गुस्सा: 'बैंक की मेज-कुर्सी ने कराई चोरी'

इस पूरे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक पत्र के जरिए अपनी लंबी चुप्पी तोड़ी है। एसआईटी को भेजे गए और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पत्र में चंपत राय ने बेहद तल्ख तेवर अपनाए हैं। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि बैंक की सलाह पर दान की गणना जमीन के बजाय मेज और कुर्सी पर बैठकर की जाने लगी, जो चोरी को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी मददगार साबित हुई। हालांकि, मामला उजागर होते ही तुरंत मेज-कुर्सी हटाकर दोबारा जमीन पर बैठकर गणना शुरू कराई गई।

चंपत राय ने सवाल उठाया कि बैंक के चेस्ट रूम के नियमों के मुताबिक, गणना क्षेत्र में प्रवेश और निकास के समय कड़ी तलाशी और बिना जेब वाले कपड़ों का उपयोग अनिवार्य होता है। इसके बावजूद, बैंक ने गणनाकर्मियों को जो कपड़े दिए, उनमें जेबें मौजूद थीं।

हाउसकीपिंग स्टाफ से कराई जा रही थी करोड़ों के चढ़ावे की गिनती

चंपत राय ने बैंक प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षा के दिशा-निर्देश पत्र (गाइडलाइन) की जानकारी ही नहीं थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि बैंक ने चढ़ावे की गणना के लिए जिन युवकों को तैनात किया था, वे असल में 'हाउसकीपिंग स्टाफ' (सफाई और रखरखाव कर्मी) के रूप में नियुक्त थे।

चंपत राय ने इस बात पर भी कड़ा ऐतराज जताया कि 6 फरवरी 2025 को जारी गणना प्रक्रिया के जिस महत्वपूर्ण दस्तावेज पर अनिल मिश्रा और एसबीआई अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर हैं, उसमें उनसे (चंपत राय से) हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए? उन्होंने दावा किया कि अगस्त 2020 से इस साल जून तक ट्रस्ट के हर अनुबंध पर उनके हस्ताक्षर होते थे, तो इस नीतिगत दस्तावेज के लिए उनके अयोध्या लौटने का इंतजार क्यों नहीं किया गया?

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आरोपियों की 40 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर, सराफा कारोबारियों तक पहुंची आंच

चढ़ावा चोरी और गबन के इस बड़े मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपियों- लवकुश मिश्रा, अनुकल्प और करुणेश की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। हालांकि विवेचक आशुतोष तिवारी ने अदालत से 7 दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी थी, लेकिन विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन कोर्ट) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपियों का पक्ष सुनने के बाद 40 घंटे की रिमांड मंजूर की है।

अब जांच एजेंसियों का दायरा सिर्फ इन आरोपियों तक सीमित नहीं रह गया है। आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल डेटा और बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण के बाद इस मामले के तार सराफा (सोने-चांदी के) कारोबारियों से जुड़ते दिख रहे हैं। इसके साथ ही, ट्रस्ट से जुड़े कुछ हालिया और चर्चित जमीन सौदों की भी समानांतर जांच की जा रही है कि कहीं चोरी का पैसा वहां तो इस्तेमाल नहीं हुआ।

'दानपात्र महासचिव का जिम्मा था, मैं क्यों दूं इस्तीफा' - स्वामी गोविंद देव गिरी

चंपत राय और डॉ अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी भी सवालों के घेरे में हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि चंपत राय से इस्तीफा लिया नहीं गया था, बल्कि उन्होंने नैतिक आधार पर खुद पद छोड़ा है और वे पूरी तरह निर्दोष हैं।

जब स्वामी गोविंद देव गिरी से पूछा गया कि क्या कोषाध्यक्ष होने के नाते वह भी अपने पद से इस्तीफा देंगे? तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "मैं क्यों इस्तीफा दूंगा? बिल्कुल नहीं दूंगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे की गणना और उसकी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से महासचिव चंपत राय के अधिकार क्षेत्र में आती थी। उनका काम केवल बैंक खातों में जमा होने वाली अंतिम राशि का लेखा-जोखा रखना है, इसलिए इस गड़बड़ी के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं।

Location :  Ayodhya

Published :  8 July 2026, 11:22 AM IST

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