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देवरिया भूमि आवंटन मामले में गिरफ्तार पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। उनकी गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए जनहित याचिका दाखिल की गई है।
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर (Img: Google)
Deoria: आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर (Amitabh Thakur) को देवरिया जिले में एक जमीन आवंटन मामले में गिरफ्तार किया गया था। अब उनका मामला भारत के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी और हिरासत में संवैधानिक और मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया है, जहां अमिताभ ठाकुर को न्याय मिलने की उम्मीद है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को देवरिया पुलिस ने 10 दिसंबर, 2025 को गिरफ्तार किया था और जिला जेल भेज दिया था। इस गिरफ्तारी का कारण एक पुराना मामला है, जो 1999 का है, जब अमिताभ ठाकुर देवरिया में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उस समय उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर औद्योगिक जमीन आवंटित की गई थी, जिसकी वजह से यह कानूनी कार्रवाई हुई है।
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय सचिव देवेंद्र सिंह राणा ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी को गलत बताया है और एक जनहित याचिका दाखिल की है। इस याचिका में कहा गया है कि यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और अमिताभ ठाकुर को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। देवेंद्र सिंह राणा का मानना है कि अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी से उनके अधिकारों का हनन हुआ है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार करते समय और उसके बाद उनकी निजता का उल्लंघन हुआ। उनके मौलिक अधिकारों का भी हनन हुआ। देवेंद्र सिंह राणा ने अदालत से कहा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जाना चाहिए।
वहीं 19 जनवरी, 2026 को एक महत्वपूर्ण घटना घटी। उस दिन, जिला न्यायाधीश धनेंद्र प्रताप सिंह की अदालत में एक फैसला सुनाया गया। इस फैसले में, पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर को जमानत मिल गई। लेकिन उसी समय, अदालत ने उनकी पत्नी नूतन ठाकुर की अग्रिम जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया।
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इस अदालती फैसले ने मामले के आसपास की चर्चा को और तेज कर दिया है। अमिताभ ठाकुर को राहत मिली है, लेकिन नूतन ठाकुर की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है। कई संगठन इसे सत्ता के दुरुपयोग के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।