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प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
Agra: आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र में एक चोरी के आरोपी के मामले में पुलिस द्वारा अदालत को गलत आपराधिक इतिहास सौंपने का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। अदालत ने इसे न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश मानते हुए थानाध्यक्ष और एक दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-13 (एडीजे-13) महेश चंद वर्मा ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
यह मामला विनायक नगर निवासी वीरेश की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें गोदाम से तांबे के तार और पावर बोर्ड चोरी होने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी विनय और अन्य लोगों को गिरफ्तार कर 5 मई को जेल भेज दिया था। जब आरोपी की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई, तो अदालत ने उसका आपराधिक रिकॉर्ड तलब किया। इसी दौरान पुलिस ने रिपोर्ट में दावा किया कि आरोपी के खिलाफ सात अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं।
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लेकिन अदालत में जांच के दौरान सामने आया कि वास्तविकता में केवल एक ही मामला लंबित था।
पुलिस की इस रिपोर्ट को अदालत ने गंभीर त्रुटि या संभावित जानबूझकर की गई गलती माना। अदालत ने पाया कि गलत जानकारी देकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी विनय की जमानत मंजूर कर रिहाई के आदेश जारी कर दिए।
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अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच अधिकारी द्वारा गलत आपराधिक इतिहास प्रस्तुत करना न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। इस मामले में सिकंदरा थानाध्यक्ष और विवेचक दरोगा नवदीप कुमार मिश्रा पर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। उन्हें जिम्मेदार मानते हुए विभागीय जांच कर सख्त रिपोर्ट देने को कहा गया है।
Location : Agra
Published : 13 June 2026, 2:13 PM IST
Topics : Agra Crime Agra news sikandra police UP News UP Police