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जानें नोएडा मजदूर आंदोलन की पूरी टाइमलाइन
Noida: दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों हालात कुछ ऐसे हैं, जहां सड़कों पर सिर्फ ट्रैफिक नहीं, बल्कि गुस्सा दौड़ रहा है। मजदूरों का आंदोलन अब शांत विरोध से निकलकर टकराव की कगार पर पहुंच चुका है। एक गोलीकांड ने इस पूरे आंदोलन को बारूद की तरह भड़का दिया और देखते ही देखते हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए। नोएडा अब विरोध और आक्रोश का केंद्र बन गया है। हर तरफ नारे, जाम और तनाव का माहौल है और प्रशासन के लिए यह स्थिति किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं।
इस पूरे आंदोलन की शुरुआत 7 अप्रैल को मानेसर से हुई थी। यहां मजदूरों ने वेतन वृद्धि और बेहतर सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। शुरुआत में यह एक सामान्य विरोध जैसा ही लग रहा था, लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन बढ़ता गया। कुछ ही दिनों में यह विरोध नोएडा पहुंचा और फिर ग्रेटर नोएडा तक फैल गया। अब हालात ऐसे हैं कि गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ जैसे जिलों में भी मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं।
नोएडा में यह आंदोलन 9 अप्रैल को फेस-2 थाना क्षेत्र के होजरी कॉम्प्लेक्स से शुरू हुआ। यहां गारमेंट और होजरी यूनिट्स में काम करने वाले मजदूर फैक्ट्रियों के बाहर इकट्ठा हुए और धरने पर बैठ गए। शुरुआती तीन दिनों तक आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। मजदूरों ने नारेबाजी की, अपनी मांगें रखीं और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की। लेकिन जब उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला, तो उनके अंदर का गुस्सा धीरे-धीरे बढ़ने लगा।
नोएडा में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, पुलिस पर हमला और आगजनी से हड़कंप
आंदोलन 12 अप्रैल को अचानक उग्र हो गया। ग्रेटर नोएडा के इकोटेक थर्ड इलाके में मिंडा कंपनी के पास प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए। इस दौरान पुलिस कार्रवाई में गोली चलने की घटना सामने आई, जिसमें एक महिला मजदूर घायल हो गई। यही घटना पूरे आंदोलन के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई। जैसे ही यह खबर फैली, मजदूरों में भारी आक्रोश फैल गया।
अगले ही दिन यानी 13 अप्रैल को हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए। फेस-2, सेक्टर-62 और एनएच-9 जैसे इलाकों में हालात बेकाबू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं, डिवाइडर पर चढ़कर नारेबाजी की और कई जगह वाहनों को रोक दिया। देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई और तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं सामने आने लगीं।
हालात बिगड़ते देख पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। कई जगह पुलिस और मजदूर आमने-सामने आ गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और भारी बल तैनात किया गया। हालांकि, हालात पर काबू तो पाया गया, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है।
इस आंदोलन का सबसे ज्यादा असर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ा है। फेस-2 के होजरी कॉम्प्लेक्स में करीब 500 कंपनियां हैं, जबकि इकोटेक थर्ड में 400 से ज्यादा फैक्ट्रियां संचालित होती हैं। इन इलाकों में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई कंपनियों को अस्थायी रूप से काम बंद करना पड़ा है, जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है।
यह आंदोलन अब सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं रहा। गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ में भी मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। गाजियाबाद में तो हालात इतने खराब हो गए कि नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मजदूरों की मांगें साफ हैं। वे न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, समय पर वेतन, सैलरी स्लिप और बोनस की भी मांग शामिल है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में मौजूदा वेतन से गुजारा करना मुश्किल हो गया है।
आंदोलन का असर ट्रैफिक पर भी साफ दिखा। दिल्ली-नोएडा बॉर्डर, सेक्टर-62, एनएच-24, डीएनडी फ्लाईवे और चिल्ला बॉर्डर पर लंबा जाम लग गया। ट्रैफिक पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए कई जगह रूट डायवर्जन लागू किया। लोगों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।
गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने श्रमिकों की समस्याओं को देखते हुए कई निर्देश जारी किए। उन्होंने समय पर वेतन, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस सुनिश्चित करने के आदेश दिए। साथ ही, शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
Location : Noida
Published : 13 April 2026, 2:37 PM IST