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वाराणसी में 3253 युवाओं ने नए साल के सेलिब्रेशन के लिए लोन लेकर 6 करोड़ रुपये खर्च किए। ईएमआई के रूप में कर्ज चुकाना अब उनके लिए एक बड़ा तनाव बन चुका है। बिजनेस एडवाइजर और मनोचिकित्सक इस पर चिंता जताते हैं।
लोन के जरिए सेलिब्रेशन का खर्च
Varanasi: वाराणसी जिले में इस साल नए साल के जश्न ने कई युवाओं को अपने बजट से बाहर जाकर खर्च करने पर मजबूर किया। क्रेडिट कार्ड, नो-कॉस्ट ईएमआई और "बाय नाउ पे लेटर" (बीएनपीएल) जैसे वित्तीय विकल्पों का उपयोग करते हुए करीब 3253 युवाओं ने तकरीबन छह करोड़ रुपये खर्च किए। यह लोन लेने का ट्रेंड युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ही उनके भविष्य में आने वाले वित्तीय तनाव की संभावना भी उत्पन्न हो रही है।
नए साल के जश्न में सबसे ज्यादा खर्च होटल बुकिंग, डिनर और पार्टी के लिए किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, होटल बुकिंग पर लगभग 2.83 करोड़ रुपये, डिनर और लंच पर 1.37 करोड़ रुपये, ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर 1.17 करोड़ रुपये और ड्रिंक पर 58 लाख रुपये खर्च हुए। इस खर्च का कुल योग 5.95 करोड़ रुपये था। इस खर्च को लेकर युवाओं ने कर्ज लिया और आने वाले महीनों में उन्हें ईएमआई के रूप में इसका भुगतान करना पड़ेगा।
एसबीआई के मैनेजर वेद प्रकाश शर्मा का कहना है कि नए साल के जश्न में खर्च करने के लिए लिया गया लोन भविष्य में वित्तीय समस्याओं का कारण बन सकता है। समय पर ईएमआई का भुगतान न करने पर ब्याज और अतिरिक्त शुल्क जुड़ जाते हैं, जिससे वित्तीय तनाव बढ़ता है। उन्हें सलाह दी जाती है कि जिम्मेदारी और जश्न के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।
मंडलीय अस्पताल की मनोरोग चिकित्सक डॉ. उपासना के अनुसार, जश्न के बाद जब युवाओं को ईएमआई के मेसेज आते हैं और उनके सामने मासिक किस्तों का हिसाब होता है, तो तनाव बढ़ जाता है। कई बार यह चिंता इतनी बढ़ जाती है कि युवाओं को रात में नींद नहीं आती और उनका काम में ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता। लंबे समय तक वित्तीय तनाव रहने से चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग और पछतावे की भावना भी उत्पन्न हो सकती है।
केस 1:
लल्लापुरा के 20 वर्षीय युवक ने नए साल के सेलिब्रेशन के लिए 20,000 रुपये का लोन लिया। उसने नाइट पार्टी में 18,000 रुपये खर्च किए। अब उसे अगले माह से ईएमआई की चिंता सताने लगी है।
केस 2:
रामनगर में एमबीए कर रहे 21 वर्षीय युवक ने 15,000 रुपये का लोन लिया। इस लोन के साथ उसने 5,000 रुपये अपनी जेब से खर्च किए। अब उसे अगले छह महीने तक हर महीने 3,000 रुपये की ईएमआई चुकानी होगी।
मनीष सिंह का कहना है कि किसी भी सेलिब्रेशन में कर्ज लेकर खर्च करना भविष्य में वित्तीय संकट का कारण बन सकता है। उनके अनुसार, लोन लेकर खर्च करना तुरंत राहत देता है, लेकिन बाद में ईएमआई का बोझ बढ़ा देता है। उन्होंने कहा कि बिना योजना के खर्च करने से बजट बिगड़ जाता है और यह गलत आर्थिक निर्णय हो सकता है।
वाराणसी में युवाओं के बीच लोन लेने का चलन बढ़ता जा रहा है, खासकर त्योहारों और खास मौकों पर। बैंक और वित्तीय संस्थाएं युवाओं को छोटे लोन और ईएमआई के रूप में आसानी से क्रेडिट उपलब्ध करा रही हैं, लेकिन यह खर्च उनकी भविष्य की वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठा सकता है।