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तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के बीच एक अनदेखा खतरा चुपचाप आकार ले रहा है। मामूली लक्षणों की अनदेखी और गलत सलाह की एक क्लिक, सेहत को ऐसे मोड़ पर पहुंचा सकती है जहां पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचता। पढ़िये ये खबर
AI से रहे सावधान (Img- Internet)
Dehradun: आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस यानी AI से लोगों को बेशक आज तमाम फायदे हो रहे हों, लेकिन हर काम में इसकी निर्भरता आपके लिए परेशानी की वजह भी बन सकती है। अक्सर कई लोग तबियत खराब हो जाने पर दवाइयों की जानकारी के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह स्थिति स्वास्थ्य लाभ के बजाय बहुत तकलीफदेह हो जाती है। इतनी तकलीफदेह कि जान तक जोखिम में भी पड़ सकती है।
उत्तराखंड के प्रसिद्ध दून अस्पताल में इन दिनों ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें लोगों ने AI के इस्तेमाल से दवाइयां ली, लेकिन ऐसा करना उनके लिए बेहद नुकसानदायक हो गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब डेढ़ दर्ज मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिन्होंने AI की सलाह पर गलत दवाइयां ली और वे रिएक्शन की चपेट में आ गए। चिकित्सकों ने इसके प्रति गहरी चिंता व्यक्त की है।
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विशेषज्ञों के अनुसार कई लोग AI को डॉक्टर समझने लगे हैं। वे AI की सलाह पर दवाइयां भी खा लेते हैं। जो उनके शरीर में नकारात्मक रिएक्शन के रूप में दिखाई देते हैं। ऐसे में मरीज को घबराहट, शरीर में खुजली, चेहरे पर सूजन और एलर्जी समेत कई दिक्कतें आती हैं। गलत दवाइयों का असर शरीर के कई अंगों पर भी पड़ता है। यह भी देखा गया है कि कई दवाओं की स्पेलिंग मिलती-जुलती होती है, ऐसे में कई बार AI की ओर से बताई गई दवाएं बीमारी से बिल्कुल अलग हो जाती हैं। इस तरह के मरीज पिछले करीब एक-डेढ़ वर्ष में बढ़े हैं।
AI पर आत्मनिर्भरता (Img- Internet)
चिकित्सकों के अनुसार लोग जांच रिपोर्ट आते ही सबसे पहले AI से अध्ययन करवाते हैं। AI बिना भौतिक जांच के आंकड़ों के आधार पर संभावित सभी बीमारियों के बारे में बताता है। उसके परिणाम इसलिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं क्योंकि AI न तो मरीज का बीपी-शुगर देखता है और न ही उसके अन्य पैरामीटर्स।
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विशेषज्ञों के अनुसार कई मरीज तो ऑपरेशन की प्रक्रिया के बारे में AI से जानकारी लेते हैं। इससे उनके मन में ऑपरेशन को लेकर डर भी पैदा हो सकता है। ऐसे में ऑपरेशन टाल देते हैं। ऐसे लोगों की बीमारी बढ़ सकती है और उनकी जान के लिए खतरा पैदा हो सकता सकता है।