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वीआईपी मूवमेंट से गरीबों को झटका…AI समिट सम्मेलन के चलते राजधानी में की गई तैयारियों की चर्चा तो सभी कर रहे हैं..लेकिन इसके चलते प्रभावित होने वाले रेहड़ी पटरी वालों की कोई सुध नहीं ले रहा है..इन बेबसों की लाचारी के बाद शासन और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि सम्मेलन शुरु होने से पहले यदि…
वीआईपी मूवमेंट से गरीब को झटका
New Delhi: भारत में आज से AI समिट की शुरुआत हो चुकी है..जो कि 20 फरवरी तक चलने वाली है..समिट का पूरा कार्यक्रम भारत मंडपम में होने जा रहा है..जिसकी अगुवाई पीएम मोदी करेंगे..समिट का ये पहला संस्करण है जब किसी ग्लोबल साउथ के देश को मेजबानी का मौका मिला है..वैश्विक सम्मेलन के चलते पूरी राजधानी को दुल्हन की तरह सजाया गया है..वहीं दूसरी तरफ आयोजन के चलते रेहड़ी पटरी वाले लोगों को कुछ दिन के लिए काम करने से रोक दिया गया है। खैर देश की किसी बड़े आयोजन के लिए सुरक्षा व्यवस्था के लिए कुछ नियम जरुरी होते हैं, लेकिन सवाल ये है कि जिन परिवारों की रोजमर्रा की आय रेहड़ी पटरी से चलते हैं उनकी क्या व्यवस्था?
समिट की शुरुआत
वैश्विक एआई समिट का नई दिल्ली में आज से चौथा संस्करण शुरु हो गया है..पूरा कार्यक्रम पीएम मोदी की अध्यक्षता में भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है..आपको बता दें कि कार्यक्रम के दौरान 100 से भी ज्यादा देशों के प्रतिनिधी पहुंचने वाले हैं..साथ ही 20 के करीब देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी आयोजन में शिरकत करने जा रहे हैं..वीआईपी इवेंट को देखते हुए प्रशासन की तरफ से पूरे इलाके में किला बंदी कर दी गई है..वहीं कुछ क्षेत्रों में पूर्ण रुप से आवाजाही पर रोक लगा दी है..आपको बता दें कि सुरक्षा कारणों से की गई इस सख्ती के चलते असंख्य लोगों का रोजगार छिन गया है..जिसके चलते उनको दो वक्त की रोटी का डर सता रहा है..
वीआईपी मूवमेंट से गरीब को झटका
समिट सम्मेलन के चलते राजधानी में की गई तैयारियों की चर्चा तो सभी कर रहे हैं..लेकिन इसके चलते प्रभावित होने वाले रेहड़ी पटरी वालों की कोई सूध नहीं ले रहा है..आपको बता दें कि सम्मेलन के वजह से राजधानी के कई हिस्सों से ठेले और पटरियां हटवा दी गई है..वहीं ठेले रेहड़ी हट जाने के कार हजारों लोगों का रोजगार छिन गया है..और उन्हें दो वक्त की रोटी की तलाश में चिंतित होना पड़ रहा है.. वहीं साथ ही अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए रोजगार से वंछित हो जाने वाले इस वर्ग को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है..इन बेबसों की लाचारी के बाद शासन और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि सम्मेलन शुरु होने से पहले यदि पीडितों के लिए कुछ रोजगार की व्यवस्था करवा दी जाती.. तो उन्हें शायद इन लोगों को रोजगार के लिए मारा-मारा नहीं फिरना पड़ता.. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा.. जब भी कोई खास आयोजन होता है तो इस प्रकार की समस्या देखने को मिलती है।
क्या कुछ व्यवस्था पहले नहीं हो सकती है?
वैसे आपको बता दें कि एक तऱफ सरकार आयोजन के चलते करोड़ों रुपए का खर्चा करके अपनी भव्यता और समृद्धि का परिचय दे रही है..तो वहीं दूसरी तरफ पाबंदियों के नाम पर इन दबे कुचले लोगों पर बेरोजगारी का संकट डाल रही है..क्या शासन आयोजन शुरु होने से पहले ही कुछ ऐसी व्यवस्था नहीं कर सकता था कि जिससे समिट को लेकर सुरक्षा में कोई बाधा न आए? साथ ही इन लोगों की भी रोजी रोटी चल जाए..खैर मौजूदा हालतों को देखकर तो ये ही कहा जाता है कि शासन और प्रशासन ने शायद इस मामले को लेकर कुछ सोचा ही नहीं..क्योंकि यदि कुछ समीक्षा की होती तो आज इन लोगों में बेरोजगार हो जाने का भय न होता..