मुंबई सीरियल ब्लास्ट: अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका, कहा- वापस हाईकोर्ट में जाकर बहस करो, जानें न्यायमूर्ति ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की 25 साल की सजा पूरी होने और अवैध हिरासत के दावे वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने उसे बॉम्बे हाईकोर्ट में अंतिम बहस करने को कहा है, जहां उसकी रिहाई का फैसला तय होगा।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 16 February 2026, 4:44 PM IST
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New Delhi: 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा, जब अदालत ने उसकी “अवैध हिरासत” वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सलेम ने दावा किया था कि वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है और पिछले 10 महीनों से गैरकानूनी तरीके से जेल में रखा गया है, लेकिन कोर्ट ने उसे बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की सलाह दे दी। इस फैसले के बाद उसकी तत्काल रिहाई की उम्मीदों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।

हाईकोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती

गैंगस्टर ने Supreme Court में याचिका दाखिल कर Bombay High Court के जुलाई 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि पहली नजर में उसकी 25 साल की सजा पूरी नहीं हुई है। सलेम का कहना था कि अच्छे व्यवहार पर मिलने वाली रिमिशन जोड़ने पर उसकी सजा पूरी हो चुकी है और उसे रिहा किया जाना चाहिए।

पीठ ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल अंतरिम राहत देने से इनकार किया है, इसलिए अंतिम बहस वहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए सलेम को हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए आवेदन करने की छूट दे दी।

सजा की अवधि पर विवाद

सलेम के वकील ने दलील दी कि महाराष्ट्र जेल नियमों के तहत रिमिशन जोड़ने पर वह 25 साल की कैद पूरी कर चुका है। वहीं जेल महानिरीक्षक के हलफनामे के मुताबिक उसने अब तक करीब 19 साल की सजा ही काटी है। इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारत सरकार को पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन का पालन करना होगा और 25 साल पूरे होने पर सलेम को रिहा करना पड़ेगा।

पुर्तगाल प्रत्यर्पण की शर्तें बनीं अहम

अबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण समझौते के तहत भारत ने भरोसा दिया था कि उसे न तो फांसी दी जाएगी और न ही 25 साल से ज्यादा जेल में रखा जाएगा। इसके अलावा 2015 में एक टाडा अदालत ने बिल्डर प्रदीप जैन हत्या मामले में उसे उम्रकैद की सजा भी सुनाई थी।

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  • New Delhi

Published : 
  • 16 February 2026, 4:44 PM IST

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