‘तलाक’ क्या व्हाट्सएप-ईमेल से होगा वैध? सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनाया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए दिए जा रहे तलाक पर तुरंत रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन तलाक-ए-हसन के एक मामले में अंतरिम रोक लगाकर दोनों को फिलहाल पति-पत्नी माना। कोर्ट ने साफ कहा- धर्म का सम्मान है, पर संविधान सर्वोपरि है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 11 February 2026, 10:25 PM IST
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New Delhi: मोबाइल स्क्रीन पर आया एक मैसेज और पल भर में रिश्ता खत्म। ईमेल के जरिए भेजा गया ‘तलाक’ और जिंदगी बिखर गई। ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या के बीच बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान माहौल गंभीर रहा। कोर्ट ने व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए दिए जाने वाले तलाक पर तुरंत अंतरिम रोक लगाने से फिलहाल परहेज किया, लेकिन साफ संकेत दिया कि बिना दोनों पक्षों को सुने कोई बड़ा आदेश नहीं दिया जाएगा।

गैर-न्यायिक तरीके से तलाक देने के मामलों पर सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने मांग की कि कोर्ट व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए तलाक देने पर तुरंत रोक लगाए। इस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अगर अभी ऐसा आदेश दे दिया गया तो लोगों के मन में कोर्ट को लेकर पूर्वाग्रह बन सकता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट निर्देश जारी करने से पीछे नहीं हटेगा, लेकिन दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही फैसला लिया जाएगा।

कोर्ट का आदेश और सख्ती

इसी दौरान एक मामले में, जहां एक मुस्लिम व्यक्ति ने पत्नी को तलाक-ए-हसन के जरिए तलाक दिया था, कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी। पत्नी की ओर से दायर याचिका पर नोटिस के बावजूद पति पेश नहीं हुआ। इसे गंभीर मानते हुए कोर्ट ने तलाक पर रोक लगाई और दोनों को फिलहाल पति-पत्नी घोषित कर दिया। साथ ही संबंधित थानाध्यक्ष को निर्देश दिया गया कि वह पति को नोटिस तामील कराए और कोर्ट में पेशी सुनिश्चित करे। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक पति कोर्ट में आकर तलाक को वैध साबित नहीं करता, तब तक तलाक पर रोक जारी रहेगी।

गलत पते पर भेजा तलाक

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पति ने कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा तीन बार तलाक का संदेश भेजा, लेकिन गलत पते पर। वह संदेश पत्नी की जगह उसके वकील को भेजा गया। पति की ओर से पेश वकील ने कहा कि जो पता उपलब्ध था, उसी पर नोटिस भेजा गया। लेकिन पीठ ने कहा कि डाक से जो नोटिस वापस आया, उसमें साफ लिखा था कि प्राप्तकर्ता नहीं मिला। ऐसे में कोर्ट को जानकारी देना जरूरी था।

मध्यस्थता का रास्ता

तलाक-ए-हसन के एक अन्य मामले में शरीयत के मुताबिक प्रक्रिया न अपनाने के आरोप लगे। इस मामले को कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए भेज दिया और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया। इससे साफ है कि कोर्ट टकराव की बजाय समाधान का रास्ता भी खुला रखना चाहता है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट सभी धर्मों का सम्मान करता है और धार्मिक मामलों में कम से कम दखल देना चाहता है। लेकिन जहां संवैधानिक और मानवाधिकार का सवाल होगा, वहां अदालत पीछे नहीं हटेगी।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 11 February 2026, 10:25 PM IST

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