सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बढ़ाई SIR की तारीख, ममता बनर्जी की याचिका पर सुनाया ये फैसला; जानिये पूरा अपडेट

वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को सख्त संदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि SIR प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं डाली जाएगी और जरूरत पड़ने पर अड़चनें हटाई जाएंगी। सुनवाई के दौरान ERO की नियुक्ति, माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका और वोटर मैपिंग में गड़बड़ियों पर भी गंभीर सवाल उठे।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 9 February 2026, 5:01 PM IST
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में अहम बातें कही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 14 फरवरी के बाद एक हफ्ते यानी कि 21 फरवरी तक का अतिरिक्त समय दिया है। साथ में यह भी बोला है कि इस प्रक्रिया में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की सुनवाई खुद चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने की हैं।

सूर्यकांत ने साफ़ शब्दों में कहा

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस दौरान कहा, “जो भी ऑर्डर या क्लैरिफिकेशन की जरूरत होगी, हम जारी करेंगे, लेकिन हम SIR में कोई रुकावट नहीं आने देंगे। यह बात सभी राज्यों को समझनी चाहिए।”

“हम SIR में रुकावट नहीं डालेंगे”

सुनवाई के दौरान, CJI सूर्यकांत ने साफ तौर पर कहा, “हम रुकावटें हटाएंगे, लेकिन हम SIR को पूरा होने में रुकावट नहीं डालेंगे। इस पर हमें बिल्कुल साफ होना चाहिए।” कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह पहले यह वेरिफाई करेगा कि उसके पिछले आदेशों का ठीक से पालन किया गया है या नहीं।

ERO की नियुक्तियों पर सवाल उठे

इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश हुए सीनियर वकील डी.एस. नायडू ने इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की नियुक्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ERO अर्ध-न्यायिक भूमिका निभाते हैं, और इसलिए, यह जरूरी है कि वे प्रशिक्षित और योग्य हों। नायडू ने बताया कि सिर्फ 64 अधिकारियों को ही फैसला लेने का अनुभव था, जबकि बाकी को सिर्फ सैलरी समानता के आधार पर चुना गया था, भले ही SIR के फैसलों को अपीलीय फोरम में चुनौती दी जा सकती है।

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माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका पर बहस

बेंच ने माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका पर भी चर्चा की। सीनियर वकील श्याम दीवान ने तर्क दिया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर के जरिए बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाना संभव नहीं है। पिछली सुनवाई में, इलेक्शन कमीशन ने माइक्रो-ऑब्जर्वर की जरूरत के पीछे स्टाफ की कमी को वजह बताया था।

अधिकारियों के नामों को जमा करने पर विवाद

सुनवाई के दौरान, अधिकारियों की लिस्ट को लेकर भी तीखी बहस हुई। सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इलेक्शन कमीशन ने कभी भी राज्य सरकार से अधिकारियों के नाम नहीं मांगे थे। जवाब में, श्याम दीवान ने दावा किया कि 8,500 अधिकारियों की एक लिस्ट कोर्ट में जमा की गई थी और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए।

भारत के चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या लिस्ट में अधिकारियों के नाम, पदनाम और पोस्टिंग शामिल हैं और क्या वे तुरंत संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को रिपोर्ट कर सकते हैं। दीवान ने हां में जवाब दिया। हालांकि, नायडू ने कहा कि कमीशन को ऐसी कोई विस्तृत लिस्ट नहीं मिली है।

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देरी और तैनाती पर कोर्ट की नाराजगी

CJI ने टिप्पणी की कि अधिकारियों के नाम 4 या 5 फरवरी तक जमा किए जा सकते थे। दीवान ने जवाब दिया कि राज्य को लिस्ट बनाने में कुछ समय लगा। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जब तक पूरी लिस्ट नहीं मिल जाती, तब तक यह प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी।

कोर्ट ने वोटर मैपिंग और लॉजिकल विसंगति (LD) कैटेगरी पर भी सवाल उठाए। दीवान ने बताया कि LD मामलों में 50 प्रतिशत से ज्यादा विसंगतियां स्पेलिंग की गलतियों के कारण थीं। CJI ने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या लगभग 70 लाख वोटर सिर्फ स्पेलिंग की गलतियों की वजह से इस कैटेगरी में आ गए हैं।

टाइमलाइन और वोटर डेटा

दीवान ने कोर्ट को बताया कि पूरी SIR प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी की जानी है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में लगभग 7.08 करोड़ वोटर हैं, जिनमें से 6.75 करोड़ की पहचान हो चुकी है। लगभग 32 लाख वोटरों की पहचान अभी बाकी है, जबकि 1.36 करोड़ वोटरों को लॉजिकल विसंगति प्रक्रिया के जरिए फ्लैग किया गया है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 9 February 2026, 5:01 PM IST

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