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मेरठ: युपी के मेरठ में सौरभ हत्याकांड से सनसनी फैली है - सौरभ, मुस्कान और साहिल. लेकिन जब से कसौल में साहिल के जन्मदिन मनाने का वीडियो वायरल हुआ, तब सक नए नाम की एंट्री हो गई है। जो 'शंकर' है, क्योंकि केक पर शंकर लिखवाया गया था। सवाल उठने लगे कि यह नाम आखिर किसका है ? क्या इस नाम के पीछे कोई गहरा राज छिपा है या मुस्कान साहिल को शंकर के नाम से बुलाती थी।
डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार,होटल में केक पहुंचाने वाले ड्राइवर ने बताया कि 11 तारीख को मुस्कान ने फोन करके एक केक मंगाया था। रात साढ़े आठ बजे, कसौल के बाजार से एक केक लाया था. मुस्कान ने उसे होटल पहुंचाने को कहा और बताया कि यह रात 12 बजे काटा जाएगा।
ड्राइव लोगों का कहना है मेरठ में साहिल के कमरे में भगवान शिव की तस्वीरें थीं। वह अक्सर चोटी रखता था और तंत्र-मंत्र में रुचि रखता था। ऐसे में हो सकता है कि मुस्कान प्यार से साहिल को 'शंकर' बुलाती हो। ड्राइवर ने यह भी खुलासा किया कि मुस्कान ने अगले दिन उससे पूछा था। तुम्हे केक मिल गया था? मैंने मना किया तो बोली हो सकता है होटल वाले खा गए होंगे।
मेरठ में साहिल के कमरे की दीवारें किसी रहस्यलोक से कम नहीं थीं. देवी-देवताओं के चित्र, तंत्र-मंत्र के संकेत, और सबसे चौंकाने वाली बात दीवार पर बने दो हाथों में से एक के हाथ में सिगरेट थी, जिसके नीचे लिखा था—"पफ..पफ..पास"। टेबल पर ऐशट्रे में कई जली हुई सिगरेट्स पड़ी थीं। लेकिन सबसे रहस्यमयी चीज थी शिव जी की तस्वीर के पास बना एक पेड़, जिससे एक पिंजरा लटका था, और उसके ऊपर ओम लिखा था।
साहिल के घर की दीवारा पर भोलेनाथ की फोटो चिपकी मिली थीं
दोनों नशे के आदी
मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला जेल में सौरभ की हत्या के आरोप में बंद मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल की दिनचर्या और उनकी नशे की लत छुड़ाने की प्रक्रिया को लेकर जेल प्रशासन ने अहम जानकारी साझा की है।वरिष्ठ जिला अधीक्षक डॉ. वीरेश के अनुसार, जेल में आने वाले हर नए बंदी का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत जब मुस्कान और साहिल की जांच की गई, तो पता चला कि वे नशे के आदी हैं। चिकित्सकों ने तत्काल उनकी चिकित्सा शुरू कर दी, और अब दोनों को नशा मुक्ति के लिए दवाइयां दी जा रही हैं। इसके अलावा, काउंसलिंग और ध्यान जैसी तकनीकों के माध्यम से भी उन्हें इस लत से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि 10 से 15 दिनों में उनकी हालत काफी हद तक सामान्य हो जाएगी।
सरकारी वकील मांगा
मुस्कान ने जेल प्रशासन के सामने यह अनुरोध किया कि उसे अपना केस लड़ने के लिए एक सरकारी वकील दिया जाए। उसके परिवार का कोई भी सदस्य अब तक उससे मिलने नहीं आया है और न ही कोई कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में जेल प्रशासन ने नियमों के तहत उसकी मांग पर विचार किया और न्यायालय में प्रार्थना पत्र भेज दिया, ताकि उसे एक सरकारी वकील मिल सके। जेल प्रशासन का कहना है कि किसी भी बंदी को कानूनी सहायता दिलाना उनका दायित्व है, और यदि कोई आधिकारिक रूप से सरकारी वकील की मांग करता है, तो उसे यह सुविधा दी जाती है।
शुरुआती दिनों में मुस्कान और साहिल दोनों डरे हुए थे और साथ रहने की इच्छा जता रहे थे, लेकिन जेल नियमों के तहत महिला और पुरुष बंदियों को अलग-अलग रखा जाता है । इसलिए उनकी यह मांग स्वीकार नहीं की गई। जेल के नियमों के अनुसार, नए बंदियों से पहले 10 दिनों तक कोई कार्य नहीं कराया जाता. इसके बाद, यदि वे चाहें, तो जेल की दिनचर्या में शामिल हो सकते हैं।
स्थिति में हो रहा सुधार
डॉक्टर के अनुसार, नशे की लत के कारण मुस्कान और साहिल को खाने-पीने में भी परेशानी हो रही थी, लेकिन जैसे-जैसे दवाइयों का असर हो रहा है, उनकी स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। शुरू में दोनों बहुत खामोश थे, लेकिन अब उनकी बातचीत में थोड़ी सहजता आई है। जेल प्रशासन का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी, तो मेडिकल कॉलेज के माध्यम से मनोचिकित्सक की भी व्यवस्था की जाएगी।
अब तक मुस्कान और साहिल के परिवार का कोई भी सदस्य उनसे मिलने नहीं आया है यहां तक कि मुस्कान ने अपनी बेटी को भी याद नहीं किया है। जेल प्रशासन पूरी सुरक्षा के साथ-साथ चिकित्सा व्यवस्था का भी ध्यान रख रहा है।ताकि दोनों कैदी सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
Published : 24 March 2025, 7:30 PM IST
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