एक मुलाक़ात: मनोज टिबड़ेवाल आकाश द्वारा 2018 बैच के युवा आईपीएस सौरभ गुप्ता का साक्षात्कार

मनोज टिबड़ेवाल आकाश

UPSC टॉपर्स के देश के सबसे बड़े टॉक-शो 'एक मुलाक़ात' में इस बार हमारे विशेष मेहमान हैं 2018 बैच के नौजवान आईपीएस सौरभ गुप्ता। इनसे हम आज बात करेंगे इनकी सफलता की कहानी पर और इनसे यह भी जानेंगे कि जो नौजवान इनकी तरह सिविल सेवा की परीक्षा में सफल होना चाहते हैं.. उन्हें क्या करना चाहिये..


नई दिल्लीः नमस्कार.. मैं हूं मनोज टिबड़ेवाल आकाश.. UPSC टॉपर्स  के देश के सबसे बड़े टॉक-शो 'एक मुलाक़ात' में आपका स्वागत है। इस सप्ताह हमारे विशेष मेहमान हैं 2018 बैच के नौजवान आईपीएस सौरभ गुप्ता।

इसी साल यूपीएससी की परीक्षा में सफल होने वाले सौरभ राजस्थान के अजमेर जिले के रहने वाले हैं। इनका जन्म 21 अक्टूबर 1993 को मुंबई में हुआ था। इन्होंने देश भर में 192वीं रैंक हासिल की और जीवन में एक मुकाम हासिल कर अपने माता-पिता का नाम रोशन किया। BITS, Pilani से बीई ऑनर्स करने वाले सौरभ ने UPSC की परीक्षा में बैठने से पहले कॉरपोरेट जगत की नौकरी भी की लेकिन इसमें इनका मन नहीं लगा। शुरू से सौरभ के मन में कुछ अलग करने का जज्बा था, जो इनके आईपीएस बनने के सफर के साथ पूरा हुआ।  

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सौरभ से आज हम 'एक मुलाक़ात' में इनकी सफलता की कहानी पर तो बात करेंगे ही साथ ही यह भी जानेंगे कि जो नौजवान सिविल सेवा एग्जाम की परीक्षा में बैठ रहे हैं, उनको किस तरह से तैयारी करनी चाहिये?  सौरभ.. आपका बहुत-बहुत स्वागत है, UPSC टॉपर्स के देश के सबसे बड़े और लोकप्रिय टॉक-शो 'एक मुलाक़ात' में: 

प्रश्नः अपनी शुरुआती जीवन के बारे में कुछ बतायें?

उत्तरः मैं मुंबई में पैदा हुआ था, मेरे पिता मरीन इंजीनियर हैं, मेरी माता रेलवे में असिस्टेंट फाइनेंसियल एडवाइजर थी, जो अभी रिटायर्ड हुई है। मेरी माता का जब राजस्थान में पहले जयपुर फिर अजमेर में ट्रांसफर हुआ तो हमारा परिवार अजमेर में रहने लगा। मेरी स्कूलिंग अजमेर में हुई, यहां एक डी- बोर्डिंग स्कूल है मयूर स्कूल, यहीं से ही मेरी पढ़ाई हुई। स्कूली शिक्षा के बाद मैंने BITS, Pilani का इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम क्रैक किया और बिट्स पिलानी में इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रॉनिक में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद प्रोफेशनली मैंने पहले बेंगलुरु में काम किया फिर हरियाणा के गुड़गांव में नौकरी की और इसके बाद मेरे UPSC की तैयारी का सफर शुरू हुआ।

प्रश्नः आप तो कॉरपोरेट जॉब में थे फिर अचानक कैसे ख्याल आया कि यूपीएससी की परीक्षा में बैठना है और आईपीएस बनना है?

उत्तरः मैं एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट था और साइंस में बहुत ज्यादा रुचि लेता था और अब भी लेता हूं। मैं तब प्रोफेशनली रोबोटिक डिजाइनर की तरह काम कर रहा था। वह जॉब आत्मिक रूप से संतुष्ट करने वाली लेकिन मुझे ऐसा महसूस हुआ कि आत्मिक संतुष्टि से ज्यादा महत्वपूर्ण भावनात्मक संतुष्टि होती है। कॉरपोरेट जॉब में मुझे ये संतुष्टि नहीं मिल रही थी।

प्रश्नः क्या आपने सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी के लिये कोई कोचिंग इंस्टीट्यूट ज्वाइन किया था?

उत्तरः जी, सिविल सर्विसेज के लिये मैंने जो सब कोचिंग इंस्टीट्यूट ज्वाइन करते हैं वो तो ज्वाइन किया ही था, जो काफी बड़े स्केल पर ऑपरेट करते हैं। हालांकि मैं दिनेश सर के साथ भी एसोसिएटिड था। जो स्कोप आईएएस के हैं, जिन्होंने बहुत ही शार्ट बैचेस में ऑपरेट किया और व्यक्तिगत तौर पर मुझे गाइड किया। ये दो तरह की गाइडेंस मैंने ली थी।

प्रश्नः इस परीक्षा की तैयारी के लिये कोचिंग क्या वाकई जरूरी है?

उत्तरः मेरे हिसाब से कोचिंग के दो पहलू होते हैं, पहला कंटेंट आपको समझ आये कि अब क्या पढ़ना है और दूसरा गाइडेंस। कंटेंट आज आसानी से उपलब्ध है, आप अगर करेंट न्यूज पेपर और इन सब चीजों से अपडेटेड रहते हैं तो बहुत हद तक आपका कंटेंट कवर हो जाता है। लेकिन गाइडेंस मुझे लगता है कि इरिप्लेसबल है, क्योंकि यूपीएससी में कहा जाता है कि “ऐवरीथिंग अंडर द सन इज द सिलेबस' लेकिन यह सिर्फ एक कहावत है, जिसे मैं सच नहीं मानता। ‘द आर्ट ऑफ आइडेंटिफाईन’ क्या रिलिवेंट है और क्या एग्जाम के लिये महत्वपूर्ण है क्योंकि एंड आफ द डे यह एक एग्जाम है और आपको इसमें सक्सेस हासिल करनी है। इसके लिये आपको समझना पड़ेगा कि क्या मुझे पढ़ना है और क्या नहीं। ये गाइडेंस मुझे लगता है कि बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इरिप्लेसबल है। कंटेंट बहुत सोर्सेज से आ सकता है और हर सोर्स का अपना फायदा है।  

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प्रश्नः कोई नौजवान अगर कोचिंग नहीं ज्वाइन कर पाते, गरीब हैं, बड़े शहरों से दूर रहेत हैं तो क्या कोई ऐसा ऑनलाइन सिस्टम है कि जहां प्रॉपर गाइडेंस मिल जाये कि कब, क्या, क्यों और कैसे करना है?

उत्तरः ऐसे अभ्यर्थी ऑनलाइन स्टडी के जरिये अपनी तैयारी कर सकते हैं। आजकल बहुत सारी ऑनलाइन चीजें आ गई हैं। जैसे रोमन सेनी इस बार जो कि पहले आईएएस ऑफिसर रह चुके हैं, उन्होंने एक एकेडमी चालू की है। न्यू इंस्टेंसिल भी आजकल एक प्लेटफॉर्म आ गया है लेकिन ये भी मेरे हिसाब से कंटेंट फुल-फिल कर रहे हैं। आप पर्सनली किसी के साथ एसोसियेट होते हैं या फिर आप एक ऐसे पियर ग्रुप में ऑपरेटर करते हैं तो आपके ही जितने मोटेवेटिव लोगों से बना है। जिसमें सबका एक लक्ष्य होता है। ये गाइडेंस जो पियर ग्रुप से आता है ये इरिप्लेसबल है। ऑनलाइन कंटेंट भी है और ऑफ लाइन कटेंट भी ये दोनों मेरे हिसाब से दोनों महत्वपूर्ण है।  

प्रश्नः जो बच्चे दिल्ली से दूर गांवों में रहते हैं.. नहीं कोचिंग कर सकते उनको आपकी क्या सलाह होगी कि वे घर से कैसे तैयारी करें?

उत्तरः जी, अगर आप कोचिंग ज्वाइन नहीं कर सकते तो भी आप यूपीएससी क्रैक कर सकते हैं। यह पूरी तरह से सत्य है, यह जरूरी नहीं कि कोचिंग करके ही यूपीएससी निकाल सकते हैं लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि कोचिंग में क्या जरूरी है और क्या नहीं। कंटेंट तो आपको ऑनलाइन बहुत सारी वेबसाइट से आसानी से मिल जाता है जैसे आईएएस बाबा, न्यू इंस्टेंसी आदि से मिल जाता है लेकिन एक चीज जो कि इरिप्लेसबल है जो कोचिंग से भी आ सकती है और आप भी खुद जनरेट कर सकते हैं वह है एक अच्छा पियर ग्रुप। मेरे समय में मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त जो कि ऑल इंडिया रैंक-86 है, इस बार आईएएस बने हैं प्रदीप जैन। हम दोनों उस दौरान साथ में पढ़ते थे और जितना उस समय मेरे परिजन मुझे समझते थे उससे ज्यादा वो मुझे समझता था। इस तरह का पियर ग्रुप जो कि बहुत ही ज्यादा प्रेरित है बहुत ही जरूरी होता है।

प्रश्नः सबसे बड़ा सवाल.. जो नौजवान अभी किसी नौकरी में हैं वे कैसे टाइम मैनेज करें कि नौकरी के साथ-साथ वे यूपीएससी की तैयारी भी कर सकते हैं?

उत्तरः वैसे तो मैंने खुद भी देखा है कि कई अभ्यर्थी ऐसे है जिन्होंने जॉब करते-करते साथ में यूपीएससी को क्रैक किया है। इन लोगों ने ऐसा कर यह तो प्रमाणित कर ही दिया है। हालांकि इस मामले में मेरा दृष्टिकोण यह था कि मैं कर सकता हूं कि नहीं। मैंने सोचा कि फॉर मी इट इज ऑल इन, एज टाइप ऑफ प्रेपोजिशन। मैं अगर कोई लक्ष्य निर्धारित करता हूं तो हर तरीके से इसे हासिल करता हूं। हालांकि मैं समझता हूं कि कई लोगों के लिये यह मजबूरी हो सकती है, उनको जॉब करनी पड़ सकती है। लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्होंने इस दौरान ऐसा करके दिखाया है, और काफी यूपीएससी में भी काफी अच्छी रैंक हासिल की है। तो यह जरूर हो सकता है लेकिन इसके लिये जिम्मेवार आप ही होंगे कि आप जॉब के दौरान इसकी तैयारी के लिये कैसे अपने समय का निर्धारण करते हैं। और आप अपनी इस तैयारी से कितने संतुष्ट होते हैं।   

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प्रश्नः यूपीएससी में आपके विषय कौन-कौन से थे?

उत्तरः मेरा ऑप्शनल सबजेक्ट पॉलिटिकल साइंस था और बाकी जो जनरल स्टडीज होता है वो तो सभी के लिये कॉमन होता ही है।

प्रश्नः अभी हमने नई दिल्ली में इसी साल 25 फरवरी को ‘डाइनामाइट न्यूज़ यूपीएससी कॉन्क्लेव-2018’ का आयोजन कराया था। देशभर से इसमें आईएएस की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी बड़ी संख्या में जुटे थे। इनमें अधिकांश यह जानना चाहते थे कि कितने घंटे नियमित पढ़ाई करनी चाहिये?

उत्तरः यूपीएससी की तैयारी के दौरान कुछ चीजें जो मुझे लगी कि जरूरी है वो ये थी कि जैसे कि द स्किल ऑफ लेंगवेजिस, द स्किल ऑफ आरटीक्यूलेशन, द स्किल ऑफ राइटिंग। कई बार जो बच्चे दूसरों के मुकाबले इसमें इतना बेहतर नहीं होते तो उनको इसका नुकसान तो पहुंचता ही है। मैं भी उन्हीं मैं से एक था, मैं एक टैक्निकल माइंड सेट के साथ आता हूं, मेरे लिये नंबर बहुत ज्यादा सेंस बनाते है। पॉलिटिकल साइंस मेरे लिये बहुत ही कठिन था। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि ये किया नहीं जा सकता है, बस आपको प्रयास ज्यादा करना पड़ेगा। ज्यादा प्रयास करेंगे और सही गलत का अंतर समझ जायेंगे तो यह ठीक हो जायेगा। यूपीएससी के लिये मैं हालांकि कोशिश करता था कि ज्यादा से ज्यादा पढूं लेकिन मैं थक जाता था इसलिये मैं 8 से 9 घंटे प्रतिदिन पढ़ाई करता था। इस दौरान मेरी दिनचर्या यह रहती थी कि मैं सुबह उठकर सबसे पहले अखबार पढ़ता था। इसके बाद मैं हर विकेंड में अपने गोल रखता था, उस वीक में मैं जनरल स्टडीज और ऑपशनल सबजेक्ट को 5-6 घंटे देता था। इसके बाद में एकाध घंटा रनिंग और एक्सरसाइज करता था। एक्सरसाइज के बाद राइटिंग प्रैक्टिस और निबंध लिखता था। इस दौरान अपनी परफॉर्मेंस पर भी ध्यान देता था। इस तरह से मेरी तैयारी रहती थी।   

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प्रश्नः UPSC की तैयारी करते समय दिमाग में कई तरह के ख्याल आते हैं कि कहीं अगर एग्जाम नहीं निकला तो, इस दौरान लोग भी तरह-तरह के सुझाव देते हैं, इससे अभ्यर्थी तनावग्रस्त हो जाता है और वह अपनी एकाग्रता खो बैठता है। इससे किस तरह से पार पाया जाये?

उत्तरः ये वाकई में देखने को मिलता है जब कोई UPSC की तैयारी करता हैं तो इन सबका सामना करना पड़ता है। मेरे साथ खुद ऐसा हुआ था मैंने दूसरे अटेम्प्ट में यूपीएससी क्रैक की। इस दौरान यह मेरे भी दिमाग में आया था कि अगर मैं इसे नहीं निकाल पाया तो.. लेकिन यह सब सवाल हमारे मन में होते हैं और हमें खुद ही इससे पार पाना होता है। जब भी मेरे पास ऐसा सवाल आता था तो मैं इसे हंसी में टाल देता था और ज्यादा इस पर सोचता नहीं था और बस यहीं सोचता था कि जो होगा देखा जायेगा। इसी मानसिकता से मुझे सफलता मिली।

प्रश्नः जो नौजवान ऑनलाइन तैयारी कर रहे हैं, उनको बताइये कि क्या-कैसे पढ़ाई करनी चाहिये?

उत्तरः जो अभ्यर्थी ऑनलाइन तैयारी कर रहे हैं उन्हें इस एग्जाम की डिमांड समझनी चाहिये। इसके लिये जरूरी होता है जो इस परीक्षा को पास कर चुके हैं तो वह उन टॉपर्स की कॉपी देखें, इसमें यह देखें कि उन्होंने प्रश्नों के उत्तर किस तरह से दिये हैं। यूपीएससी की तैयारी को लेकर एक भ्रम ये बना हुआ है कि बहुत ज्यादा पढ़ना पढ़ता है जो कि पूरी तरह से गलत है। आपको एग्जाम की अच्छी तरह से डिमांड समझनी पड़ेगी। जब आप इसे समझ जायेंगे तो तब आपके पास दो चीजें रह जाती है- 1. कंटेंट बिल्ट करना और 2. प्रेजेंटेशन प्रैक्टिस करना। कंटेंट आप चार से पांच महीने में बिल्ट कर सकते हैं, जितनी भी एनसीईआरटी उससे तैयारी करें, ज्यादा रेफरेंस बुक न तो पढ़ें न ही रैफर करें, समय खराब होता है। इसके बाद राइटिंग प्रैक्टिस करें और प्रेजेंटेशन प्रैक्टिस कर लें यह बहुत है।

प्रश्नः यूपीएससी की तैयारी के लिये सब्जेक्ट सलेक्शन के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिये?

उत्तरः सब्जेक्ट सलेक्ट करते समय एक बात का यह ध्यान रखना चाहिये कि आप इस सब्जेक्ट के साथ परसिवयर कर सकते हैं कि नहीं, क्योंकि यह कोई दो महीने का एग्जाम तो है नहीं। एक अटैम्प्ट, हो सकता है कि दो अटैम्प्ट, यह भी हो सकता है तीन अटैम्प्ट भी लग जाये। तो अगर आपको तीन साल तक कोई सब्जेक्ट पढ़ना है तो आप समझिये कि आप उसके साथ बियर कर सकते हैं कि आपको वह इंटरसेटिंग लगता है कि नहीं। हो सकता है कि आप उस पर सही से प्रदर्शन न कर सके। मैथ्स के बैकग्राउंड से आने से मेरे लिये यह च्वाइस थी कि मैं मैथ्स लूं, हालांकि मैं मैथ्स में बढ़िया था लेकिन तैयारी के दौरान यह उतनी महत्वपूर्ण नहीं लगी। इसलिये मैंने पॉलिटिकल साइंस को चुना जबकि इसमें मेरी पकड़ नहीं थी। लेकिन मैंने इसे चुना और मैंने इसमें देश की पॉलिटिक्स को समझा और यह मुझे काफी अच्छा भी लगा। वैसे भी कहा जाता हैं, कि जहां चाह है वहीं राह है।  

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प्रश्नः इंटरव्यू में आपका अनुभव कैसा रहा, किस तरह के आपसे सवाल पूछे गये?

उत्तरः इंटरव्यू में जो पहली चीज मुझे महसूस हुई बाहर निकलकर वो ये थी कि इंटरव्यू इज ऑल अबाऊट योअर डेफ्ट, यानी आप किसी विषय को लेकर कितनी गहराई में सोचते हैं। सामान्यतः UPSC की तैयारी के दौरान हम ब्रेथ पर फोकस करते हैं, मेन्स तक भी हम तैयारी करते हैं तो हम ज्यादा से ज्यादा प्वाइंट्स पैकिंग करना चाहते हैं। अपने उत्तर में ज्यादा से ज्यादा प्रॉसपेक्टिव पैकिंग करना चाहते हैं। लेकिन इंटरव्यू में हमसे ये आशा की जाती है कि, हम चीजों को समझते कितना है, हमारी चीजों को लेकर अपनी सोच क्या हैं? जैसे कि मुझसे इंटरव्यू की शुरुआत में पूछा गया था कि आपके हिसाब से इकोनॉमिक डेवलपमेंट क्या और इंडिया का इकोनॉमिक डेवलपमेंट क्यों नहीं हो रहा है? वैसे देखा जाये तो इस पर हर रोज नये-नये लेख छपते रहते हैं, हर रोज ही बहुत नोटेड इकोनॉमिस्ट के विचार भी आते रहते हैं। लेकिन इस पर आपको खुद सोचना पड़ेगा कि क्यों नहीं हमारा देश आर्थिक तौर पर मजबूत नहीं हो पा रहा है। बजाय इसके कि इस पर इसके जानकार क्या कह रहे हैं, जैसे अमर्त्य सेन ने ये कहा या फिर कोई और ये कह रहा है। तो यह पूरी तरह से आपकी सोच पर निर्भर करता है कि आप चीजों को कैसे लेते हैं वैसे भी किसी भी विषय पर आप तब गहराई में सोचते हैं जब आप इस पर चिंतन-मनन करते हैं। इसलिये पूरी तरह से अपनी नजरें देश के आर्थिक विकास पर चल रही गतिविधियों पर रखें और इस पर प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे तो आपकी इस पर अच्छी पकड़ बन जायेगी।

प्रश्नः कैडर अलॉट करने का भारत सरकार ने जो नया नियम बनाया है, जोन वाईज वाला, इस बारे में कुछ बताईये, क्या मानते हैं नया ठीक है या पुराना?

उत्तरः एक नई प्रभावी कार्डर पॉलिसी सिविल सर्विसेज एग्जाम 2017 आईं है। इस कार्डर पॉलिसी में पहले हम कार्डर लिनियरली हमारे पास जो स्पेस होता था हम इसे लिनियरली अरेंज कर लेते थे। स्टेट-1, स्टेट-2, स्टेट-3, आपके पास पूरी आजादी होती थी कि आप किसी को भी प्राथमिकता दे सकते थे लेकिन अब इंडिया को पांच जोन्स में बांट दिया गया है, जिसमें- नार्थ, वेस्ट, ईस्ट, साऊथ और नार्थ-ईस्ट। अब आपकी प्राथमिकता शीघ्रता से नहीं हो सकती, आपने अगर किसी एक जोन से पिकअप कर लिया तो दूसरी परफरेंस उस जोन से नहीं हो सकती। किसी और जोन से होने होगी, तीसरी अब पहले दो से नहीं हो सकती और किसी जोन से होनी होगी तो इस प्रकार आपकी परफरेंसिस पूरे इंडिया में फैल जाती है और किसी भी एक रीजन की तरफ कंसंट्रेटेड नहीं रहती तो जो कि पहले ट्रेंड देखा जाता था। मेरे लिहाज से तो यह बहुत ही अच्छा मूव है, क्योंकि यह दिखाता है कि आप ऑल इंडिया सर्विस के लिये चुने गये हैं न कि किसी क्षेत्र विशेष के लिये। इसलिये जहां भी आपको भेजा जा रहा है, वहां पर आप पूरी ईमानदारी और पूरी निष्ठा व उमंग के साथ कार्य करे।

प्रश्नः आपकी ट्रेनिंग कब शुरू होगी और कहां होगी, कब पहली बार वर्दी पहनने का शुभ दिन आयेगा?

उत्तरः मेरी ट्रेनिंग 17 दिसंबर को सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी हैदराबाद में शुरू होगी। इसमें पहले बेसिक ट्रेनिंग जो फेज वन है, वो 45 सप्ताह तक चलेगी और इसके बाद डिस्ट्रिक प्रेक्टिकल ट्रेनिंग होगी फिर फेज-2 की ट्रेनिंग होगी।

प्रश्नः UPSC परीक्षा पास करने के बाद क्या आपके मन में कभी ख्याल आया कि काश आईएएस बन जाता?

उत्तरः अगर पूरी ईमानदारी से कहूं तो बिल्कुल ये ख्याल आया था और ख्याल आता भी है, क्योंकि आईएएस और आईपीएस दोनों में जॉब प्रोफाइल बिल्कुल अलग है। लेकिन जैसा कि पहले भी कहा मैंने कि द लार्जर प्रॉस्पैक्टिव ऑफ इमोशनल सटिस्फेक्शन,ऑफ सर्विंग ए नेशन, सर्विंग ए पीपल। ये दोनों की सर्विस में सटिसफाई होता है। हालांकि अगर मुझे आईएएस में सेवा करने का मौका मिलता है तो वह भी अच्छा होगा बट इवन द आईपीएस इज वैरी-वैरी गुड, एंड आईएम सेटिस्फाईड विथ दैट। 

प्रश्नः आजकल जहां देखो वहीं क्राइम की खबरें छायी रहती हैं.. 4-5 साल बाद जब आप किसी जिले में एसपी होंगे तो फिर वहां की कानून-व्यवस्था ठीक रहे, ये आपके लिये बड़ी चुनौती होगी, इससे आप कैसे निपटेंगे?

उत्तरः लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन रखने के लिये फर्स्ट ऑफ ऑल तो जो मुझे पर्सनली लगता है वो है द क्रियेटिव यूज ऑफ वन्स टाइम, अगर क्राइम एसोसिएटिड विद द यूथ देखे तो मैं समझता हूं कि यह इट इज द रिजल्ट ऑफ फ्रस्टेशन, दोज फ्रस्टेशन कैन वी ऑफ मैनी टाइप्स, पर्सनली मेरी लाईफ में स्पोर्ट्स का बहुत ज्यादा इंपोर्टेंस रहा है। हालांकि यह काफी छोटा प्वाइंट्स भी माना जा सकता है, पर मैं जरूर चाहूंगा कि द यूथ सुड भी इन्वाल्व इन सच टाइप्स आफ स्पोर्ट्स एक्टिविटी, जो करेक्टर भी बिल्ड करता है और डैफीनेटली इट कैन बी वैरी यूजफुल। दूसरा जो क्राइम है, वह प्रॉस्पेक्टिव क्राइम है, वह ऑर्गनाइज क्राइम है, ऑर्गनाइज क्राइम जो कि इंडिविजुअल से एलीमिनेट नहीं करता लेकिन ऐसे जो माफियाज होते हैं, उनके लिये तो डेफिनेटली द फोर्स ऑफ द लॉ हैज टू वी सुप्रीम, और ऐसे लोगों को हर तरह से ब्रेक ही करना हमारे लिये सही है। ऐसी ही थर्ड कैटेगरी कैन बी सम शार्ट ऑफ पॉलिटिकल वेर्स्टन इंटरेस्ट, उनको भी फ्रेंड ऑफ करना हमारी कांस्टिट्यूशनल रिस्पॉन्सबिलिटी है।   

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प्रश्नः कहते हैं कि राजनीतिक हस्तक्षेप पुलिस अफसरों पर बहुत रहता है, ऐसे में आप अपनी निष्पक्षता को कैसे सुनिश्चित करेंगे?

उत्तरः जी, पॉलिटिकल प्रेशर को मैं किसी नेगेटिव एटीट्यूड से देखना पसंद नहीं करता। मेरे हिसाब से हम एज ए परामेंट सिविल सर्विस, आर प्लेस अंडर द एक्जक्यूटिव, जो कि रिप्रजेंटेटिव ऑफ द पीपल है।  तो दे आर द चैनल जो पब्लिक रिवैंस हमारी तरफ ऐड्रैस करते हैं। तो अगर रैदर दैन, हैड द कंफ्रस्टेशन  इज द एटीट्यूड, ऑफ व्हाट्स द पॉलिटिकल इंटरफेयरेंस अगर वो पॉलिटिकल इंटरफेयरेंस जैनवैन है, टूवर्स द जैनवैन पब्लिक रिवैंस है, तो इट इज माई एब्सल्यूट रिस्पॉन्सबिलिटी टू टेक केयर ऑफ इट। हां अगर अनड्यू फॉर प्रेशर है, दैन इट इज माई कॉन्सिट्यूशनल रिस्पॉन्सबिलिटी टू एनस्योर इट डज नॉट हैपन।

प्रश्नः आजकल नौजवानों में गुस्सा बहुत देखने को मिल रहा है, क्या वजह मानते हैं, कैसे गुस्से पर कंट्रोल करना चाहिये?

उत्तरः गुस्सा जैसे कि मैंने पहले कहा कि कई बार जब यूथ आता है तो आइडेंटिटी क्राइसिस हिट करने लगता है। इसमें अगेन गुस्से को कंट्रोल करने के लिये हमें  एक टाईप ऑफ क्रियेटिव इन्वॉलवमेंट रखनी चाहिये। ए टाईप ऑफ गुड आईडेनटिटी ह्विच यूथ कैन एसोसिएट इन दैट। दैट काइंड इन द फॉर्म ऑफ इम्पॉलयमैंट, दैट काइंड इन द फॉर्म ऑफ पब्लिक सर्विस, दैट काइंड इन द फॉर्म ऑफ सोशल सर्विस।  

प्रश्नः बहुत संघर्ष करके, तपस्या करके कोई नौजवान यूपीएससी के सिविल सर्विसेज जैसे एग्जाम को क्रैक करता है। सफल होने के बाद साल दो साल बाद चार साल, पांच साल बाद अक्सर ये खबर आती है कि फलां आईएएस ने, आईपीएस ने आत्महत्या कर ली है, यूपी से भी कई मामले आए, कानपुर में तैनात आईपीएस ने पारिवारिक कलह में आत्महत्या की, क्या वजह आप देखते है पारिवारिक या सर्विस का दबाव और इससे कैसे बचा जाना चाहिये?

उत्तरः डेफिनेटली, ये न्यूज मेरे लिये भी काफी हैरान करने वाली थी और ये बात तो कही भी जाती है कि सर्विसेज आर वैरी डिमानडिंग इन नेचर, ऑफकोर्स अगर आप पूरे देश को सर्व करते हैं तो यू हैव टू वी रैडी फॉर इट। एंड इट डिमांड सैकरीफाइसेस इन वैरीयस फॉर्म्स, वी इन फॉर्म ऑफ पर्सनल लाइफ, वी इन फॉर्म ऑफ प्रोफेशनल लाइफ। जैसा कि कहा जाता है कि हैव ए हॉबी, टेक इज ए स्ट्रेस फर्स्ट स्टैप वो सारी चीजें तो डेफिनेटली है ही, जो कि मेरे ख्याल से इन सर्विस में सबको करनी ही चाहिये, मैं भी डेफिनेटली ही करूंगा। अदर दैन दैट कि फैमिली कितनी रोल होते हैं टू सपोर्ट ए पर्सन हू जो कि इतने बड़े अंडरवर्ल्ड में लगा हुआ है। तो आई थिंक इज द मिक्चर ऑफ ऑल द फैक्टर, सबको ही सपोर्ट करना पड़ेगा।

प्रश्नः भ्रष्टाचार हमारे देश में एक बड़ी समस्या बन चुका है, जिलों में अधिकतर आम गरीब की समस्या थाने और तहसील से जुड़ी होती है। थाना आपके अंडर में आयेगा, थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार को कैसे मिटायेंगे आप?

उत्तरः करप्शन जनरली होता इसलिये है, क्योंकि किसी के पर्सनल इंटेशन होते है। डैफिनेटली मेरे ख्याल से अगर मैं सिर्फ पुलिस सर्विसेज की बात करूं तो एक फीलिंग जो मुझे इंडियन पुलिस में लैकिंग लगती है वो है जो द प्राइड द यूनिफॉर्म। अगर कोई भी चाहे वह सबसे नीचे लेबल का कॉन्सटेबल हो या फिर सबसे ऊपर लेबल के डीजीपी हो, अगर वो यूनिफॉर्म पहनते हैं तो दे हैव अपोल द वैल्यू ऑफ यूनिफॉर्म, उनको ये बात समझनी पड़ेगी कि ये एक सर्विस है न कि एक प्रोफेशन। ये वैल्यू इन्सिटल करना बहुत ज्यादा इम्पोर्टेंट है, और जहां तक मैंने देखा है आजकल जो न्यू एज पुलिस है, वो बहुत ज्यादा ए ब्राइट है भी। जो एकदम यंग पीपल है, हू आर ज्वाइनिंग द पुलिस, दे हैव द वैल्यू सिस्टम राइट एंड फिक्स। अदर दैन दैट सर, हां पावर इनसैंटिव को भी किल करना जरूरी है। डायरेक्ट किरिटीसिजम, मैकेनिज्म, टूवाडर्स द स्कीम होना जरूरी है। एकदम नॉर्मल जनता आपसे कह सके कि यहां पर हमसे फलां-फलां इंसान ने घूस ली है। कुल मिला-जुलाकर वैल्यू सिस्टम भी डाला जाये और पवन इनसैंटिव भी गेन करा जाये।  

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प्रश्नः आईपीएस बनने से पहले और बाद की आपकी जिंदगी में व्यक्तिगत तौर पर क्या अंतर आया है?

उत्तरः आईपीएस बनने से पहले और बाद में वैसे तो सबसे बड़ा अंतर तो अंदरूनी है, मेरे अंदर है। बाहर तो ठीक है, लोग थोड़ा ज्यादा एसोसिएट करते है मुझसे लोग ज्यादा रिकॉगनाइज करते हैं। अटेंशन देते हैं, रिस्पैक्ट भी देते हैं, बट अंदर से जो मेरे अंदर सबसे बड़ा चेंज आया है, वह यह है कि पहले जब में सर्विसेज को बाहर से देखता था तो मुझे ऑल द अमेजिंग थिंग दिखती थी जो कि सर्विसेज में है, अब जब मैं सर्विसेज का पार्ट हूं तो मुझे द हैवीनेस ऑफ द रिस्पांसबिलिटी समझ में आती है।

प्रश्नः अपने पेरेंट्स की कौन सी बात आप हमेशा अपने साथ जीवन में याद रखते हैं?

उत्तरः मेरे पेरेंट्स की सबसे इम्पोरटेंट बात जो माता कहती है वो तीन शब्द है- 'कर्म प्रधान है'। ये गीता से आता है और मैं गीता से काफी प्रेरित भी हूं।  मेरी मदर ने डेफिनेटली मुझे हार्ड वर्क की इम्पोरटेंस समझाई है। मेरे फादर के पर्सनैलटी ट्रेड से जिनसे में इन्फ्लूयेंस्ड हूं, वो है इन द सेन्स ऑफ रिस्पांसबिलिटी, हाऊ टू टेक रिस्पांसबिलिटी ऑफ ऑल द पीपल हू आर ह्विथ यू हू आर ऐसोसिएटिड ह्विथ यू।

प्रश्नः आपके लाइफ का गोल क्या है, जीवन का लक्ष्य क्या है?

उत्तरः जीवन का लक्ष्य ये ही है कि, वैसे तो छोटे-छोटे लक्ष्य बहुत सारे होते हैं, बट द ओवर आई थिंक लक्ष्य यह है कि आई सुड बी ऑफ सर्विस टू दिस नेशन, आई सुड बी सर्विस टू पीपल अराउंड मी, सो दैट इवन ह्वैन आईएम गोन आई हैव इलैटीसी। 

प्रश्नः जो नौजवान आपकी तरह आईपीएस बनना चाहते हैं, यूपीएससी की परीक्षा क्रैक करना चाहते हैं उनको आपका सक्सेस मंत्रा?

उत्तरः दो वर्ड्स जो मैंने सीखे और मेरे हिसाब से सक्सेस मंत्रा हैं भी, वो है बिलीव इन योरसेल्फ, डेफिनेटली आप हमेशा इवैलूवेट अपनी गलतियों को समझते रहे, इम्प्रूव करते रहे। बट मोर दैन योअर फ्रेंड्स, मोर दैन योअर टीचर, मोर दैन योअर पेरेंट्स ऑलसो। अगर आपको कुछ सही लगता है तो बिलीव इन योरसेल्फ सेल्व एंड डू इट। बिकॉज आपसे बैटर जज कोई उस पर्टिकुलर सिचवेशन का नहीं है। क्योंकि आप यू आर थिंक ऑफ इट, सो बिलीव इन योरसेल्फ। 

बहुत-बहुत धन्यवाद सौरभ, UPSC टॉपर्स के देश के सबसे बड़े लोकप्रिय टॉक शो 'एक मुलाक़ात' में हमसे बातचीत करने के लिये और देश के नौजवानों को अपनी राय और सलाह बताने के लिये।

तो ये थे 2018 बैच के यूपीएससी की परीक्षा में आईपीएस बनने वाले सौरभ गुप्ता। जिन्होंने बताया कि 'कर्म ही प्रधान है' और कभी भी निराश मत होईये, असफलता आती है तो भी उसको मजबूती से डटकर मुकाबला करे और अपने लक्ष्य के प्रति सतत प्रयत्नशील रहिये। इससे एक न एक दिन आप अपने लक्ष्य के प्रति जरूर पहुंचेंगे। आपसे अगले सप्ताह फिर मुलाकात होगी 'एक मुलाक़ात' में देश की किसी और बड़ी शख्सियत के साथ, तब तक नमस्कार।

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#DNPoll क्या लगता है इस बार के लोकसभा चुनाव में बेरोज़गारी व महँगाई जैसी असली समस्या मुद्दे बन पायेंगे?