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विश्व अस्थमा दिवस प्रतिवर्ष मई महीने के पहले मंगलवार को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस अस्थमा रोग से बचाव को लेकर विशेषज्ञों ने जरूरी निर्देश दिये हैं। पूरी खबर..
लखनऊ: आज अस्थमा दिवस है। देखा जाये तो विश्व में करीब 33 करोड़ अस्थमा के मरीज हैं। इसके 10 प्रतिशत यानि 3 करोड़ अकेले केवल भारत में हैं, यानि भारत में इस रोग से ज्यादा लोग ग्रसित है।
अस्थमा रोग से बचाव को लेकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के डॉ वेदप्रकाश ने प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता की। इस मौके पर वरिष्ठ पल्मोनरी मेडिसिन चिकित्सक डॉ राजेंद्र प्रसाद के अलावा हेमंत मौर्या, अजय वर्मा जैसे वरिष्ठ चिकित्सको के शिरकत की। बैठक को सम्बोधित करते हुए डॉ वेद प्रकाश ने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज के लोगों को अस्थमा के बारे में सही जानकारी मिले। जो कई तरह की भ्रांतिया लोगों ,में इस रोग के बारे में फैली है। उनको खत्म करना है।
इस मौके पर डॉ अजय वर्मा ने कहा कि ये एक बंशानुगत बीमारी है और इसको होने बाले नवजात में जाने से रोका जा सकता है। लेकिन ग्रसित रोगी इसका इलाज कराता रहे। अस्थमा को पूरी तरह से ठीक नहीं कर सकते। मगर पूर्ण रूप से नियंत्रण करके स्वस्थ जिंदगी जी सकते है। इसके लिए जागरूक रहना होगा कि केवल सांस फूलना ही अस्थमा की बीमारी नहीं है। साँस फूलने के कई और कारण भी हो सकते हैं। उन्होनें बताया की प्रकृति की तरह भी दोबारा लौटना होगा। क्यूंकि प्रकृति से दूर जाना ही इन रोगो का कारण है। अब जिस तरह से सिजेरियन प्रसव कराया जा रहा है। उससे ये बीमारी नवजात में हो रही है। हमको साधारण प्रसव को बढ़ावा देना होगा। सभी सरकारी चिकित्सालयों में इसी कारण ज्यादातर साधारण प्रसव कराया जाता है। वहीं खास तौर पर महिलाओ द्वारा शिशु को स्तनपान कराना भी बहुत जरुरी है। लेकिन जनता इन बातों की महत्ता को समझेगी तो काफी हद तक इस रोग पर लगाम लगायी जा सकेगी।
Published : 1 May 2018, 9:58 AM IST
Topics : अस्थमा दिवस अस्थमा रोग जरूरी निर्देश बचाव लखनऊ विशेषज्ञों
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