जाने.. मौत के बाद गंगा में क्यों विसर्जित की जाती हैं अस्थियां?

डीएन ब्यूरो

भारत रत्न और दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रविवार से अस्थि कलश यात्रा हरिद्वार से शुरू की जा रही है। अनंत यात्रा पर गये अटल जी की अस्थियों को देश भर की नदियों में प्रवाहित किया जायेगा। डाइनामाइट न्यूज़ के इस लेख में जाने, अस्थियों को नदियों में विसर्जित किये जाने के महत्व को..

अस्थि कलश (फाइल फोटो)
अस्थि कलश (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: हिंदू धर्म शास्त्रों में कई तरह के संस्कारों का महत्व है। जन्म से लेकर मौत तक अलग-अलग मौकों पर इंसान के अलग-अलग तरह के संस्कार किये जाते हैं। सभी संस्कारों को पूर्ण करने पर ही एक जीवन चक्र पूरा माना जाता है। इनमें से कई संस्कार वैज्ञानिक और धार्मिक आधार पर भी खरे उतरते है। मौत के बाद मृत देह को जलाकर अंतिम संस्कार करना भी हिंदू धर्म शास्त्रों में जरूरी माना गया है और उसके बाद मृतक की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करना अति उत्तम माना जाता है।  

अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने से मिलता है स्वर्ग

 

शरीर के पांच तत्व

शास्त्रों के अनुसार इंसान का शरीर पाँच तत्वों से मिलकर बना होता है। मृत देह को जलाने से शरीर के पांचों तत्व अपने मूल रूप में वापस लौट जाते है। माना जाता है कि आत्मा आकाश तत्व में विलीन हो जाती है। उसके बाद शरीर को जलाने से अग्नि तत्व, धुएं से वायु और राख से भूमि तत्व में पूरी शरीर विलीन हो जाता है। इसी कारण से बचे हुए तत्व जल के लिए हम अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करते है। माना जाता है कि अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने से मृत व्यक्ति स्वर्ग का भागीदार बनता है। 

प्राणदायिनी भी है गंगा

 

स्वर्ग में होती है पूजा

हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक जिस जीव की अस्थियां जिस समय तक गंगा में रहती हैं, उस जीव को उतने वक्त तक स्वर्ग में पूजा जाता है। शास्त्रों में गंगा को प्राणदायिनी भी कहा गया है। इसलिये गंगा को सर्वश्रेष्ठ तीर्थ भी कहा जाता है। गंगा को सभी नदियों में श्रेष्ठ माना जाता है। इसे मां का दर्जा भी दिया गया है। इसलिये कहा जाता है कि गंगा में आने वाले सभी जीव चाहे वह दैत्य ही क्यों न हो, सभी को  मोक्ष की प्राप्ति होती है। किसी भी व्यक्ति की अस्थियों को पतित पावनी गंगा में विसर्जित करने से वह व्यक्ति स्वर्ग में भी पूजनीय होता हैं।  

अस्थियों को फूल भी कहा जाता है

 

सभी शुभ लोकों में आनंद की प्राप्ति

हिंदू धर्मशास्त्रों में मृतक जीव की अस्थियों को फूल भी कहा जाता है। फूल अपार श्रद्धा और आदर के भाव है। जिस तरह से जन्म के समय किसा संतान को फल के रूप में माना जाता है, उसी प्रकार मृत व्यक्ति या पूर्वजों की अस्थियों को फूल के रूप में माना जाता है। इन फूलों (अस्थियों) को गंगा में प्रवाहित करने वाला व्यक्ति भी पूण्य का भागीदार होता है। कहा जाता है कि जब तक मृतक जीव की अस्थियां गंगा में उपस्थित रहती है, उसे स्वर्ग के अलावा सभी शुभ लोकों में आनंद की प्राप्ति होती है। इसलिये जब तक किसी मृत जीव की अस्थियां को माँ गंगा में प्रवाहित नहीं किया जाता, तब तक उसे परलोक की प्राप्ति नहीं होती है। इसलिये गंगा में अस्थि विसर्जन धर्मसम्मत और कल्याणकारी है। 

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