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नई दिल्ली: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ट्रैफिक नियमों को लेकर नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) सुप्रीम कोर्ट में पेश किया है। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और ट्रैफिक सिस्टम को ज्यादा सख्त और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नए SOP को जारी किया गया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, इस SOP के तहत अब ट्रैफिक नियम तोड़ने पर सिर्फ फोटो से नहीं, बल्कि वीडियो सबूत से चालान होगा। SOP में वीडियो साक्ष्य रिकॉर्ड करने पर भी ध्यान दिया गया है, ताकि ध्यान भटकने और गलत दिशा में वाहन चलाने के कारण होने वाले एक्सीडेंट और मौतों को कम किया जा सके।
हाई-टेक होंगे कैमरे
यह कैमरे इतनी हाई-टेक होंगे कि 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक भी साफ-साफ वीडियो रिकॉर्ड कर सकेंगे। यानी कोई भी वाहन तेज रफ्तार से निकल जाए, तब भी नियम तोड़ने की तस्वीर और वीडियो दोनों कैमरे में आ जाएंगे।
SOP के अनुसार, ऑटोमेटेड कैमरा इनफोर्समेंट सिस्टम ट्रैफिक उल्लंघनों की निगरानी के लिए प्राथमिक तरीका होगा। यह सिस्टम ड्राइवरों और प्रवर्तन एजेंसियों दोनों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत हेलमेट या सीट बेल्ट न पहनना, मोबाइल फोन पर बात करना, रॉन्ग साइड गाड़ी चलाना, और ड्राइव करते हुए खाना या पीना जैसी हरकतों को अब कैमरे में रिकॉर्ड किया जाएगा।
1 से 10 सेकंड तक बनानी होगी वीडियो
वहीं चालान जारी करने के लिए कम से कम 1 सेकंड और ज्यादा से ज्यादा 10 सेकंड तक की वीडियो रिकॉर्डिंग करनी होगी, जिसमें गाड़ी का नंबर, लोकेशन, तारीख और समय जैसी सारी जानकारी साफ दिखाई देनी चाहिए। साथ ही ये सिस्टम रियल टाइम में काम करेगा, जैसे ही कोई नियम तोड़ेगा, एक सेकंड के भीतक ट्रैफिक डिपार्टमेंट को अलर्ट भेज दिया जाएगा।
यह पहल सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के जवाब में की गई है जिसमें 23 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
Published : 14 April 2025, 6:56 PM IST
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