Who is Raja Muthupandi: पिता ने की मजदूरी, भाई ने छोड़ दिया अपना सपना… फिर कैसे बना भारत का ‘सिल्वर बॉय’?

Raja Muthupandi ने CWG 2026 में रजत पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। गरीबी, तीन सर्जरी, डेंगू, पीलिया और आर्थिक संकट से जूझने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। भाई के त्याग और माता-पिता की मेहनत ने उन्हें ग्लास्गो में करियर का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 27 July 2026, 11:29 AM IST
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New Delhi: भारतीय वेटलिफ्टर राजा मुथुपांडी ने Commonwealth Games 2026 (CWG 2026) में रजत पदक जीतकर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। लेकिन उनकी सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, परिवार का त्याग और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की प्रेरणादायक कहानी छिपी है। तमिलनाडु के एक छोटे से कस्बे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले राजा आज लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं।

CWG 2026 में जीता रजत पदक

ग्लास्गो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में राजा मुथुपांडी ने पुरुषों के 65 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 286 किलोग्राम (126 किग्रा स्नैच और 160 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। स्वर्ण पदक मलेशिया के मुहम्मद अजनिल बिन बिदिन ने जीता, जबकि कांस्य पदक पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू के खाते में गया।

पिता मजदूर, मां सफाई कर्मचारी... बचपन में देखी गरीबी

12 जनवरी 2000 को तमिलनाडु के कोविलपट्टी में जन्मे राजा का बचपन बेहद मुश्किलों में बीता। उनके पिता माचिस फैक्ट्री में दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि मां एक मिठाई की दुकान में सफाई का काम करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार दो वक्त का भोजन जुटाना भी चुनौती बन जाता था।

भाई ने छोड़ा सपना, राजा ने पूरा किया

राजा के बड़े भाई ने सबसे पहले वेटलिफ्टिंग शुरू की थी। लेकिन परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें अपना सपना छोड़ना पड़ा। इसके बाद राजा ने उसी सपने को आगे बढ़ाने का फैसला किया। भाई का त्याग ही उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया।

तीन सर्जरी, डेंगू और पीलिया... फिर भी नहीं मानी हार

2019 से 2025 के बीच राजा की जिंदगी में कठिन दौर आया। उन्हें कोहनी और घुटने के लिगामेंट की गंभीर चोटें लगीं, अपेंडिक्स का ऑपरेशन कराना पड़ा और दो बार डेंगू व एक बार पीलिया से भी जूझना पड़ा। लगातार चोटों और आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने खेल छोड़ने का मन भी बना लिया था।

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रेलवे की नौकरी मिली, फिर बदला फैसला

भारतीय रेलवे में नौकरी मिलने के बाद राजा ने खेल से दूरी बनाने की सोची। वह स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग का कोर्स करने भुवनेश्वर पहुंचे, लेकिन वहां खिलाड़ियों को अभ्यास करते देख उनके भीतर का खिलाड़ी फिर जाग उठा। कोच विजय शर्मा और साथियों के प्रोत्साहन ने उन्हें दोबारा वेटलिफ्टिंग की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया।

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संघर्ष के बाद मिला सबसे बड़ा इनाम

2025 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत जीतने के बाद राजा ने 2026 सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और फिर CWG 2026 में रजत पदक जीतकर अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया। पदक जीतने के बाद उन्होंने इसे अपने माता-पिता और कोच विजय शर्मा को समर्पित करते हुए कहा कि उनके त्याग और भरोसे के बिना यह सपना कभी पूरा नहीं हो सकता।

Location :  New Delhi

Published :  27 July 2026, 11:29 AM IST

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