DN Exclusive: गांव की गलियों से वर्ल्ड कप तक…कैसे शुरू हुआ दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल का सफर?

क्या आप जानते हैं कि जिस खेल के लिए आज करोड़ों लोग टीवी स्क्रीन से चिपके रहते हैं, उसकी शुरुआत किसी भव्य स्टेडियम में नहीं, बल्कि गांवों और कस्बों में हुई थी?

Updated : 11 June 2026, 3:22 PM IST
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New Delhi:  आज फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अरबों लोगों का जुनून और इमोशन बन चुका है। दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियमों से लेकर छोटी-छोटी बस्तियों तक फुटबॉल का जादू सिर चढ़कर बोलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस खेल के लिए आज करोड़ों लोग टीवी स्क्रीन से चिपके रहते हैं, उसकी शुरुआत किसी भव्य स्टेडियम में नहीं, बल्कि गांवों और कस्बों में हुई थी? उस दौर में एक गेंद के पीछे पूरा गांव दौड़ पड़ता था। न कोई तय मैदान होता था, न रेफरी और न ही कोई निश्चित नियम। यही वजह है कि फुटबॉल का इतिहास जितना रोमांचक है, उतना ही हैरान करने वाला भी है।

फुटबॉल का सबसे पुराना रूप

फुटबॉल की सबसे पुरानी जड़ें प्राचीन चीन में मिलती हैं। फीफा भी इस बात को मान्यता देता है कि फुटबॉल का सबसे पुराना रूप चीन में खेला जाता था, जिसे ‘कुजु’ कहा जाता था। 476 ईसा पूर्व के ऐतिहासिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। कुजु का मतलब होता है ‘पैर से गेंद को मारना’। हान राजवंश के दौरान यह खेल इतना लोकप्रिय था कि सैनिक इसे अपनी ट्रेनिंग का हिस्सा बनाकर खेलते थे। उस समय चमड़े की गेंद में पंख भरे जाते थे, जबकि बाद में हवा से भरी गेंदों का इस्तेमाल शुरू हुआ।

खिलाड़ियों को रोकने के लिए धक्का

चीन के अलावा जापान में भी सदियों पहले फुटबॉल जैसे खेल का प्रचलन था। वहां ‘केमारी’ नामक खेल खेला जाता था, जिसमें खिलाड़ी एक घेरे में खड़े होकर गेंद को जमीन पर गिरने से बचाते थे। यह प्रतिस्पर्धा से ज्यादा कौशल और तालमेल का खेल था। आज भी जापान के कुछ हिस्सों में पारंपरिक आयोजनों के दौरान इसे खेला जाता है। प्राचीन यूनान में  एपिस्किरोस नाम का खेल खेला जाता था, जिसमें दो टीमें मैदान पर एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला करती थीं। खिलाड़ियों को गेंद को विरोधी क्षेत्र के पीछे पहुंचाना होता था और इसमें हाथों व पैरों दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता था। वहीं रोमन साम्राज्य में हार्पस्टम नामक खेल लोकप्रिय था, जिसे योद्धाओं का खेल माना जाता था। इसमें खिलाड़ियों को रोकने के लिए धक्का देना और शारीरिक ताकत का इस्तेमाल करना आम बात थी।

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गांवों और स्कूलों में फुटबॉल बेहद लोकप्रिय

समय के साथ यह खेल यूरोप में फैलता गया। 19वीं सदी तक ब्रिटेन के गांवों और स्कूलों में फुटबॉल बेहद लोकप्रिय हो चुका था, लेकिन हर जगह इसके नियम अलग-अलग थे। कई बार मैच शुरू होने से पहले ही टीमें नियम तय करने में घंटों लगा देती थीं। बाद में ब्रिटिश स्कूलों ने फुटबॉल को शिक्षा और अनुशासन का हिस्सा बनाया, जिससे खेल को संगठित रूप मिलने लगा।फुटबॉल के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ साल 1863 में आया, जब लंदन में विभिन्न क्लबों के प्रतिनिधि एक साथ बैठे और खेल के लिए एक समान नियम बनाने पर सहमत हुए। कई बैठकों के बाद 8 दिसंबर 1863 को फुटबॉल एसोसिएशन  की स्थापना हुई और आधुनिक फुटबॉल के नियम तय किए गए। यहीं से आधुनिक सॉकर का जन्म माना जाता है। इसके बाद 1872 में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच पहला आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैच खेला गया, जो ड्रॉ रहा।

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गांवों की धूल भरी गलियों से शुरू

20वीं सदी की शुरुआत तक फुटबॉल इंग्लैंड की सीमाओं को पार कर पूरे यूरोप में फैल चुका था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए एक वैश्विक संस्था की जरूरत महसूस हुई। इसी के चलते 21 मई 1904 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में सात देशों ने मिलकर फीफा  की स्थापना की। यही संस्था आज दुनिया भर में फुटबॉल का संचालन करती है और फीफा विश्व कप जैसे भव्य टूर्नामेंट आयोजित करती है। गांवों की धूल भरी गलियों से शुरू हुआ फुटबॉल का यह सफर आज अरबों लोगों की धड़कन बन चुका है। शायद यही वजह है कि फुटबॉल को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि दुनिया को जोड़ने वाला सबसे बड़ा इमोशन कहा जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  11 June 2026, 3:21 PM IST

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