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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (Img- Pinterest)
Chandigarh: कानून की रक्षा और आम जनता को इंसाफ दिलाने की जिम्मेदारी संभालने वाले वकील ही जब अदालतों के दरवाजे बंद कर दें, तो न्याय की उम्मीद लगाए बैठे आम इंसान कहां जाएं? पंजाब के जिला न्यायालयों में पिछले 27 दिनों से चल रही वकीलों की हड़ताल को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है।
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दोटूक कहा कि किसी भी जायज शिकायत पर बातचीत हो सकती है, लेकिन अनुचित मांगों को मनवाने के लिए न्यायिक कामकाज को पंगु बनाना किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऐसा महसूस होता है कि यह सोचकर दबाव बनाया गया है कि पूरा सिस्टम अंततः घुटने टेक देगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायिक व्यवस्था को इस तरह दबाव में नहीं झुकाया जाएगा। अदालत ने सवाल उठाया कि अदालतों का कामकाज ठप करके वकील समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?
पंजाब के जिला न्यायालयों में पिछले करीब एक महीने से कामकाज लगभग पूरी तरह ठप पड़ा है। जमानत, मुकदमों की सुनवाई और अन्य जरूरी कानूनी राहतों के लिए आम जनता अदालतों के चक्कर काट रही है। हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि 27 दिनों से न्यायिक राहत का रुक जाना एक गंभीर मामला है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
यह पूरा विवाद राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा शुरू की गई 'विधिक सहायता बचाव वकील योजना' (एलडीसी) से जुड़ा है। इस योजना का मकसद गरीब और जरूरतमंद आरोपियों को संस्थागत रूप से मुफ्त और मजबूत कानूनी सहायता देना है। इसके तहत पूर्णकालिक वकीलों की नियुक्ति की गई है।
पंजाब के कई बार एसोसिएशनों का मानना है कि इस नई व्यवस्था के आने से पहले से चली आ रही पैनल वकील प्रणाली प्रभावित हुई है। उनका दावा है कि इससे पुराने वकीलों के काम और अवसरों पर बुरा असर पड़ रहा है।
इसी के विरोध में कई बार संघों ने काम बंद करने का फैसला लिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि योजना से जुड़ी शिकायतों का हल बातचीत से हो सकता है, लेकिन हड़ताल के रास्ते को सही नहीं ठहराया जा सकता।
Location : Chandigarh
Published : 28 July 2026, 10:29 AM IST