अब कोर्ट की LIVE कार्यवाही का वीडियो नहीं कर सकेंगे वायरल! सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा है कि अदालत की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना पूर्व अनुमति सोशल मीडिया या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, रीपोस्ट या अपलोड नहीं किया जा सकेगा। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार समेत अन्य पक्षों से भी जवाब मांगा है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 24 July 2026, 4:22 PM IST
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही के वीडियो और ऑडियो के सोशल मीडिया पर बढ़ते दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी व्यक्ति को अदालत की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, रीपोस्ट या अपलोड करने की इजाजत नहीं होगी। इस आदेश का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखना और रिकॉर्डिंग के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

बिना अनुमति नहीं कर सकेंगे पोस्ट

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से जुड़ी किसी भी ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को साझा करने से पहले संबंधित महासचिव की अनुमति जरूरी होगी। इसी तरह हाईकोर्ट की रिकॉर्डिंग के लिए संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति लेनी होगी।

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में साफ कहा कि रिकॉर्डिंग को निकालना, उसमें किसी तरह का बदलाव करना, उसे वायरल करना, सोशल मीडिया पर पोस्ट करना या किसी भी डिजिटल मंच पर अपलोड करना बिना पूर्व अनुमति प्रतिबंधित रहेगा।

क्यों आया यह आदेश?

यह मामला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया जिसमें अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्ड किए गए वीडियो के सोशल मीडिया पर कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि अदालत की कार्यवाही के वीडियो को संदर्भ से हटाकर वायरल किया जा रहा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका पैदा होती है।

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केंद्र सरकार ने भी जताई सहमति

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत के सामने कहा कि इस विषय पर स्पष्ट नियम बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने दलील दी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अदालत की रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल को लेकर उचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की भ्रामक या भड़काऊ सामग्री प्रसारित न हो।

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अन्य पक्षों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया है। अंतिम फैसला आने तक अदालत का यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। माना जा रहा है कि भविष्य में अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  24 July 2026, 4:22 PM IST

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