हिंदी
कश्मीरी तेज गेंदबाज आकिब नबी (IMG: X)
New Delhi: कभी कर्फ्यू की वजह से मैदान तक पहुंचना मुश्किल था, तो कभी अभ्यास के लिए अच्छी पिच और कोच नहीं मिले। लेकिन जम्मू-कश्मीर के बारामूला का एक लड़का हार नहीं माना। घर के आंगन में कुर्सी को बल्लेबाज बनाकर घंटों गेंदबाजी की, खुद को निखारा और अब उसी मेहनत ने उसे टीम इंडिया की टेस्ट टीम तक पहुंचा दिया। जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने के बाद भारतीय टीम में शामिल किए गए तेज गेंदबाज आकिब नबी की कहानी संघर्ष, धैर्य और जुनून की मिसाल है।
श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए शुरुआती टीम में आकिब नबी का नाम नहीं था। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बावजूद चयन न होने पर कई पूर्व क्रिकेटरों ने सवाल उठाए थे। हालांकि, जसप्रीत बुमराह के चोटिल होकर सीरीज से बाहर होने के बाद चयनकर्ताओं ने आकिब नबी को भारतीय टीम में शामिल किया। यह उनके करियर का पहला राष्ट्रीय टीम चयन है और उन्हें श्रीलंका में टेस्ट डेब्यू का मौका भी मिल सकता है।
बारामूला में पले-बढ़े आकिब नबी के लिए क्रिकेट खेलना आसान नहीं था। कश्मीर में कई बार कर्फ्यू लग जाता था, जिससे मैदान तक पहुंचना संभव नहीं होता था। अच्छी पिचें, आधुनिक सुविधाएं और क्रिकेट उपकरण भी आसानी से उपलब्ध नहीं थे। ऐसे हालात में आकिब ने हार नहीं मानी। वह घर के आंगन में एक कुर्सी को बल्लेबाज मानकर घंटों गेंदबाजी का अभ्यास करते थे। उनका मानना था कि सुविधाओं की कमी बहाना नहीं बन सकती।
आकिब के पिता चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रहे। लेकिन आकिब का सपना सिर्फ क्रिकेट था। सुबह से शाम तक उनका पूरा समय गेंद और बल्ले के साथ गुजरता था। परिवार की उम्मीदों और अपने सपनों के बीच उन्होंने क्रिकेट को चुना और उसी राह पर आगे बढ़ते रहे।
साल 2015 में आकिब नबी ने जम्मू-कश्मीर की अंडर-19 टीम से अपने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने अंडर-23 टीम में जगह बनाई। सी.के. नायडू ट्रॉफी में केरल के खिलाफ पांच विकेट लेकर उन्होंने पहली बार अपनी प्रतिभा का दम दिखाया। यही प्रदर्शन उनके करियर का शुरुआती टर्निंग पॉइंट बना।
आकिब ने 2018 में लिस्ट-ए क्रिकेट में पदार्पण किया और दो साल बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआती दो लिस्ट-ए सीजन में उन्होंने 18 मैचों में 34 विकेट लिए, जबकि पहले फर्स्ट क्लास सीजन में 24 विकेट अपने नाम किए। हालांकि, इसके बाद उनका प्रदर्शन कुछ समय के लिए गिर गया। अगले तीन फर्स्ट क्लास सीजन में वह केवल 22 विकेट ही ले सके। इसकी एक बड़ी वजह व्यवस्थित गेंदबाजी कोच का न होना भी रही।
भारत को मिला तीसरा गोल्ड… फिर भी मेडल टैली में पीछे क्यों रह गई टीम इंडिया? वजह कर देगी हैरान
आकिब ने बताया कि उस समय जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ में गेंदबाजी कोच नहीं था, जिससे उनकी तकनीकी कमियों पर काम नहीं हो पा रहा था। बाद में गेंदबाजी कोच पी. कृष्णकुमार ने उनके साथ सीम पोजिशन, गेंद की ग्रिप, रन-अप और मानसिक मजबूती पर काम किया। यही बदलाव उनके करियर का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ।
आकिब नबी को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा पहचान रणजी ट्रॉफी में मुंबई के खिलाफ मुकाबले से मिली। रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, अजिंक्य रहाणे, श्रेयस अय्यर और शिवम दुबे जैसे स्टार खिलाड़ियों से सजी मुंबई की टीम के खिलाफ उन्होंने दूसरी पारी में चार विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को ऐतिहासिक जीत दिलाई। इस प्रदर्शन के बाद क्रिकेट जगत का ध्यान उनकी ओर गया और वह चयनकर्ताओं की नजर में आ गए।
2025-26 रणजी ट्रॉफी आकिब नबी के करियर की सबसे यादगार रही। उन्होंने 10 मैचों में 60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई। पूरे टूर्नामेंट में उनकी गेंदबाजी औसत करीब 12 रही, जो किसी भी तेज गेंदबाज के लिए शानदार मानी जाती है।
Location : New Delhi
Published : 3 August 2026, 4:19 PM IST