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रुद्रांक्ष पाटिल की सफलता की पूरी कहानी (Img: X)
New Delhi: एक समय था जब महाराष्ट्र के ठाणे का एक युवा लड़का शतरंज की बिसात पर चालें चलता था और फुटबॉल के मैदान पर अपनी ऊर्जा लगाता था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जब उसने बंदूक उठाई तो उसका निशाना इतना सटीक था कि दुनिया ने उस पर ध्यान दिया। यह कहानी भारत के युवा शूटर रुद्राक्ष पाटिल की है, जिन्होंने 2026 एशियाई खेलों (Asian Games 2026) में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
16 दिसंबर 2003 को महाराष्ट्र के ठाणे में जन्मे रुद्राक्ष ने शुरू में शूटिंग में करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा था। बचपन में उनकी रुचि शतरंज और फुटबॉल में थी। हालांकि, परिवार के सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने शूटिंग की दुनिया में कदम रखा। उनके पिता बालासाहेब पाटिल और मां हेमांगिनी पाटिल ने उनके सपनों को साकार करने में अहम भूमिका निभाई। धीरे-धीरे शूटिंग उनके लिए सिर्फ एक खेल से बढ़कर जुनून बन गई। कम उम्र में ही रुद्राक्ष ने बड़े मंच पर चमकने की क्षमता दिखाई।
रुद्राक्ष के करियर में 2022 में एक बड़ा मोड़ आया। उन्होंने मिस्र के काहिरा में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
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सिर्फ 18 साल की उम्र में वर्ल्ड चैंपियन बनकर रुद्राक्ष ने भारत का मान बढ़ाया। वह 10 मीटर एयर राइफल श्रेणी में यह उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे भारतीय शूटर बने; उनसे पहले ऐसा करने वाले एकमात्र भारतीय अभिनव बिंद्रा थे। इस जीत ने उन्हें दुनिया के बेहतरीन शूटर्स में जगह दिलाई। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने पेरिस ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल किया।
रुद्राक्ष की ताकत न केवल उनकी सटीक शूटिंग में है, बल्कि दबाव वाले मुकाबलों के दौरान शांत रहने की उनकी क्षमता में भी है। ऐसे कई मौके आए जब बड़े टूर्नामेंटों में स्वर्ण पदक उनके हाथ से फिसल गया फिर भी उन्होंने हर हार से सबक लिया और जोरदार वापसी की। इसी मानसिक मजबूती ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
रुद्राक्ष ने एशियाई खेलों में एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित की। उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत के पदक तालिका में एक और उपलब्धि जोड़ी। इससे पहले उन्होंने टीम स्पर्धा में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था। हिमांशु ढिल्लों और पार्थ माने के साथ मिलकर उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भारत को रजत पदक दिलाने में मदद की।
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रुद्राक्ष पाटिल की कहानी यह दिखाती है कि खेलों में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि धैर्य, कड़ी मेहनत और सही दिशा से मिलती है। शतरंज की चालों और फुटबॉल के मैदान से शुरू हुआ सफर अब शूटिंग रेंज के सबसे बड़े मंच तक पहुंच गया है। विश्व चैंपियन बनने के बाद एशियाई खेलों के इस पदक ने उनकी उपलब्धियों की सूची में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है।
Location : New Delhi
Published : 21 September 2026, 11:20 AM IST