यहां रोज होती है आत्माओं की पूजा, शादी और त्योहारों में दिया जाता है भूतों को न्योता, जानें छत्तीसगढ़ की अनोखी कहानी

बचपन में सुनी भूत-प्रेत की कहानियों से अलग, छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के आदिवासी समुदाय आत्माओं को डर का नहीं, बल्कि श्रद्धा और पूजन का विषय मानते हैं। यहां आत्माओं के लिए ‘आना कुड़मा’ नामक घर बनाए जाते हैं, जहां पूर्वजों की आत्माएं वास करती हैं और जिनकी पूजा रोज की जाती है। यह परंपरा न सिर्फ आस्था से जुड़ी है, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे सांस्कृतिक विश्वासों की झलक भी देती है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 24 July 2025, 9:54 AM IST
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Chhattisgarh News: भारत में भूत-प्रेतों की कहानियां प्रचलित रही हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र के आदिवासी समुदाय ने आत्माओं को एक अलग ही दृष्टिकोण से देखा है। यहां आत्माएं डराने वाली नहीं, पूर्वजों की उपस्थिति और मार्गदर्शन का प्रतीक मानी जाती हैं। बस्तर के इन गांवों में आत्माओं के लिए विशेष घर बनाए जाते हैं, जिन्हें "आना कुड़मा" कहा जाता है और इन घरों में पूर्वजों की आत्माओं की नियमित पूजा होती है।

आना कुड़मा: आत्माओं का घर

‘आना कुड़मा’ शब्द का अर्थ है आत्माओं का घर। आदिवासी समाज में यह एक गहरी आस्था और सांस्कृतिक प्रतीक है। गांव में एक छोटा सा कक्ष मंदिर की तरह बनाया जाता है, जिसमें मिट्टी की हांडी रखी जाती है। विश्वास किया जाता है कि इसी हांडी में पूर्वजों की आत्माएं वास करती हैं। गांव के हर घर में एक कक्ष केवल पितरों के लिए होता है, और उसी में यह हांडी रखी जाती है। जब किसी गोत्र के व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उनकी आत्मा को 'आना कुड़मा' में स्थापित किया जाता है और उनका नियमित पूजन-अर्चन शुरू होता है।

आत्माओं को दिया जाता है न्योता

पूर्वजों की पूजा, पितृपक्ष नहीं

इन गांवों में रहने वाले आदिवासी पितृपक्ष या श्राद्ध नहीं मानते। उनका मानना है कि पूर्वजों की आत्माएं आज भी उनके साथ हैं और वे रोज उनकी पूजा-अर्चना करके उन्हें सम्मान देते हैं। यही कारण है कि यहां के लोग अपने पितरों को आत्माओं के घर में स्थायी रूप से वास कराने की परंपरा निभाते हैं।

हर खास अवसर पर आत्माओं को दिया जाता है न्योता

पूर्वजों की आत्माएं यहां केवल पूजनीय नहीं, बल्कि हर खास अवसर पर अह्म भूमिका निभाती हैं। जब गांव में कोई शादी होती है, तो सबसे पहले आत्माओं को न्योता दिया जाता है। आदिवासी समाज मानता है कि जब तक पूर्वजों की आत्माएं वर-वधू को आशीर्वाद नहीं देतीं, तब तक शादी पूरी नहीं मानी जाती। यही नहीं, गांव में जब नई फसल आती है, तब उसका पहला हिस्सा आत्माओं को चढ़ाया जाता है। यदि कोई बिना चढ़ावा दिए फसल का उपयोग कर ले, तो माना जाता है कि गांव में संकट आ सकता है। ऐसे में फिर से पूजा करके क्षमा याचना की जाती है।

आत्माएं करती हैं बुरी शक्तियों से रक्षा

देवलाल दुग्गा, जो कि छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, बताते हैं कि आदिवासी समाज मानता है कि आत्माएं बुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं। उनका यह भी कहना है कि आत्मा में ही परमात्मा का वास होता है और पूर्वजों की आत्माएं गांव की शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।

केवल पुरुषों को है आत्माओं के घर में प्रवेश की अनुमति

इस धार्मिक और सामाजिक परंपरा में एक विशेष नियम यह भी है कि आना कुड़मा में केवल पुरुषों को ही प्रवेश की अनुमति होती है। महिलाएं और लड़कियां आत्माओं के घर में नहीं जा सकतीं। हालांकि, शादी के समय महिलाएं भी आत्माओं को प्रणाम करके दूर से श्रद्धा व्यक्त करती हैं।

Location : 
  • Chhattisgarh

Published : 
  • 24 July 2025, 9:54 AM IST

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