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बप्पा की विदाई (सोर्स- Pinterest)
New Delhi: गणेश उत्सव अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। आज यानी 20 सितंबर 2026 को उत्सव का सातवां दिन है। जिन भक्तों ने अपने घरों में सात दिनों के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की है, वे आज विधि-विधान के साथ बप्पा को विदाई दे रहे हैं। यदि आप सुबह के समय किसी कारणवश विसर्जन नहीं कर पाए हैं, तो परेशान होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज दिनभर में कई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें बप्पा को विदाई दी जा सकती है।
विशेषज्ञ ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, आज यानी 20 सितंबर को गणपति विसर्जन के लिए निम्नलिखित शुभ काल निर्धारित किए गए हैं-
दोपहर का शुभ काल: दोपहर 1 बजकर 47 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक का समय विसर्जन के लिए अत्यंत उत्तम रहेगा।
संध्या एवं रात्रि का समय: शाम 6 बजकर 21 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 47 मिनट तक शुभ, अमृत और चर काल का संयोग रहेगा। धार्मिक दृष्टि से यह समय भी बप्पा की विदाई के लिए बहुत फलदायी माना गया है।
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(इसके अलावा, सुबह 7 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक चर, लाभ और अमृत काल का समय भी विसर्जन के लिए था।)
भक्त अपनी सुविधानुसार इनमें से किसी भी उपयुक्त मुहूर्त का चयन करके बप्पा को विदाई दे सकते हैं।
गणेश विसर्जन से पहले पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ बप्पा की पूजा-अर्चना करना आवश्यक है। पूजा की प्रक्रिया इस प्रकार है-
स्नान और श्रृंगार: सबसे पहले भगवान गणेश को स्नान कराएं या साफ वस्त्र से प्रतिमा को अच्छी तरह पोंछकर उनका भव्य श्रृंगार करें।
प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: बप्पा को उनकी सभी प्रिय चीजें जैसे दूर्वा, ताजे फूल, सिंदूर, अक्षत और मोदक श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
आरती और मनोकामना: इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर उनकी आरती उतारें। पूजा संपन्न होने के बाद गणपति की मूर्ति को उनके स्थान से थोड़ा सा हिलाएं और फिर सभी घरवाले उनके कान में अपनी मनोकामना कहें।
यदि आप किसी जल स्रोत पर जाने में असमर्थ हैं, तो घर पर ही बेहद सरल विधि से विसर्जन कर सकते हैं-
सामग्री की पोटली: विसर्जन से पहले एक साफ कपड़ा लें और उसमें बप्पा की सभी प्रिय पूजन सामग्रियों को रखकर एक पोटली तैयार कर बांध लें।
पात्र में जल व्यवस्था: अब घर पर ही एक साफ पात्र में स्वच्छ जल भरें और उसमें कुछ फूल आदि डालें।
अंतिम विदाई: इसके बाद पूरी श्रद्धा और भावुक मन से गणपति की मूर्ति को धीरे-धीरे उस पात्र में विसर्जित कर दें।
इस प्रकार आप बिना किसी परेशानी के पूरी आस्था के साथ सातवें दिन भी गणेश विसर्जन की प्रक्रिया को संपन्न कर सकते हैं।
Location : New Delhi
Published : 20 September 2026, 12:35 PM IST