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राधा अष्टमी 2026 (Img- AI)
New Delhi: भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ब्रजभूमि में हमारी लाडली जी यानी श्री राधा रानी का पावन प्राकट्य दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
इस पावन अवसर पर बरसाना, वृंदावन और देश भर के मंदिरों में भक्तों का तांता लगता है। घर-घर में किशोरी जी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। राधा रानी की विशेष कृपा पाने के लिए इस दिन उन्हें 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी को अपने हाथों से 16 श्रृंगार से सजाया था। यही वजह है कि राधा अष्टमी के दिन जो भी भक्त प्रेमपूर्वक किशोरी जी को सुहाग सामग्री चढ़ाता है, उस पर राधा-कृष्ण दोनों की संयुक्त अनुकंपा बरसती है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य लेकर आता है, जबकि कुंवारी कन्याओं को मनचाहा और योग्य जीवनसाथी प्राप्त होने का वरदान मिलता है।
किशोरी जी के श्रृंगार में शामिल हर एक वस्तु का अपना एक विशेष आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है:
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शास्त्रों में स्पष्ट वर्णन है कि जहां राधा रानी की पूजा होती है, वहां श्री कृष्ण बिना बुलाए ही खिंचे चले आते हैं। यदि पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव चल रहा हो या विवाह में अनचाही अड़चनें आ रही हों, तो राधा अष्टमी के दिन किशोरी जी के चरणों में 16 श्रृंगार अर्पित करके पूजा अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सदैव मधुरता, प्रेम और शांति का वास बना रहता है।
Location : New Delhi
Published : 19 September 2026, 10:32 AM IST