Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी पर किशोरी जी को चढ़ाये ये 16 श्रृंगार, मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी और कान्हा का प्रेम

Radha Ashtami 2026: राधा अष्टमी पर किशोरी जी को क्यों चढ़ाया जाता है 16 श्रृंगार? जानिए द्वापर युग में श्री कृष्ण से जुड़ी कथा, नीली पोशाक का रहस्य और अखंड सौभाग्य पाने के लिए सुहाग सामग्री का धार्मिक महत्व।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 19 September 2026, 10:32 AM IST
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New Delhi: भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ब्रजभूमि में हमारी लाडली जी यानी श्री राधा रानी का पावन प्राकट्य दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

इस पावन अवसर पर बरसाना, वृंदावन और देश भर के मंदिरों में भक्तों का तांता लगता है। घर-घर में किशोरी जी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। राधा रानी की विशेष कृपा पाने के लिए इस दिन उन्हें 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

स्वयं कान्हा ने रचाया था राधा रानी का श्रृंगार

पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी को अपने हाथों से 16 श्रृंगार से सजाया था। यही वजह है कि राधा अष्टमी के दिन जो भी भक्त प्रेमपूर्वक किशोरी जी को सुहाग सामग्री चढ़ाता है, उस पर राधा-कृष्ण दोनों की संयुक्त अनुकंपा बरसती है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य लेकर आता है, जबकि कुंवारी कन्याओं को मनचाहा और योग्य जीवनसाथी प्राप्त होने का वरदान मिलता है।

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16 श्रृंगार का क्या है विशेष धार्मिक महत्व?

किशोरी जी के श्रृंगार में शामिल हर एक वस्तु का अपना एक विशेष आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है:

  • बिंदी व सिंदूर: माथे की बिंदी एकाग्रता का और मांग का सिंदूर पूर्ण समर्पण व सौभाग्य का प्रतीक है।
  • काजल व नथ: काजल बुरी नजर से रक्षा करता है, जबकि नथ स्त्री तत्व और गरिमा को दर्शाती है।
  • चूड़ियां, मेहंदी व आलता: कांच की चूड़ियां और आलता घर में समृद्धि लाते हैं, वहीं मेहंदी सुहाग का सूचक है।
  • पायल व बिछिया: पायल की छनकाहट से घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और बिछिया पति की दीर्घायु से जुड़ा है।
  • नीली पोशाक: राधा रानी को विशेष रूप से नीले रंग का लहंगा या साड़ी अर्पित की जाती है, क्योंकि नीला रंग कान्हा का प्रिय रंग माना जाता है।

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राधा रानी की पूजा से दूर होते हैं सारे वैवाहिक क्लेश

शास्त्रों में स्पष्ट वर्णन है कि जहां राधा रानी की पूजा होती है, वहां श्री कृष्ण बिना बुलाए ही खिंचे चले आते हैं। यदि पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव चल रहा हो या विवाह में अनचाही अड़चनें आ रही हों, तो राधा अष्टमी के दिन किशोरी जी के चरणों में 16 श्रृंगार अर्पित करके पूजा अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सदैव मधुरता, प्रेम और शांति का वास बना रहता है।

Location :  New Delhi

Published :  19 September 2026, 10:32 AM IST

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