अक्षय तृतीया 2026 पर बड़ा कन्फ्यूजन! एक नहीं दो दिन की तिथि, जानें सही तारीख और चूक गए तो क्या होगा नुकसान

अक्षय तृतीया 2026 इस बार खास है, क्योंकि तिथि को लेकर बड़ा भ्रम बना हुआ है। लोग समझ नहीं पा रहे कि सही दिन कौन-सा है और कब पूजा या खरीदारी करना सबसे शुभ रहेगा। अगर आप भी इस दिन कुछ खास करने की सोच रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी हो सकती है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 7 April 2026, 2:37 PM IST
google-preferred

New Delhi: सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन वर्ष 2026 में यह पर्व तिथि को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बार तृतीया तिथि दो दिन पड़ने के कारण लोगों के बीच असमंजस की स्थिति है कि आखिर सही दिन कौन-सा है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए सही जानकारी बेहद जरूरी हो गई है।

कब मनाई जाएगी अक्षय तृतीया?

पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।

अक्षय तृतीया का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के लक्ष्मीनारायण स्वरूप और भगवान कुबेर की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे ‘अखा तीज’ भी कहा जाता है और यह दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी शुभ कार्य करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। यही वजह है कि इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है।

घर में छुपी ये गलती बन सकती है संकट की वजह, सच जानकर रह जाएंगे हैरान!

अगर पूजा के शुभ समय की बात करें तो 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक का समय सबसे उत्तम माना गया है। यह अवधि लगभग 1 घंटा 32 मिनट की रहेगी। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।

खरीददारी करने का शुभ समय

वहीं, खरीदारी के लिए भी यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से लेकर 20 अप्रैल की सुबह 5:51 बजे तक लगभग 19 घंटे का लंबा शुभ समय उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा जो लोग 20 अप्रैल को खरीदारी करना चाहते हैं, वे सुबह 5:51 बजे से 7:27 बजे के बीच सोना-चांदी या अन्य वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं।

अक्षय तृतीया पर बन रहे शुभ योग

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो इस दिन के महत्व को और बढ़ा रहे हैं। स्वाति और विशाखा नक्षत्र के साथ ब्रह्म और इंद्र योग का संयोग बन रहा है। इसके अलावा गजकेसरी और मालव्य राजयोग भी बन रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन योगों में किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

क्या दक्षिण मुखी घर वास्तव में अशुभ है या सिर्फ एक भ्रम? वास्तु से समझिए पूरी कहानी

धार्मिक दृष्टि से अक्षय तृतीया को वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। इसे साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में शामिल किया गया है, जिसमें बिना पंचांग देखे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।

मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, जप और तप का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसलिए इसे ‘अक्षय’ कहा गया है। इस दिन विशेष रूप से स्नान-दान, पूजा और जरूरतमंदों की सहायता करने का महत्व बताया गया है। सोना-चांदी, वाहन या संपत्ति खरीदने की परंपरा भी इस दिन से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि इस दिन की गई खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी का वास होता है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। डाइनामाइट न्यूज़ इसकी पूर्ण सत्यता या सटीक परिणामों की कोई पुष्टि नहीं करता। जानकारी को अमल में लाने से पहले किसी ज्योतिषी या संबंधित व्यक्ति से परामर्श अवश्य लें।

Location :  New Delhi

Published :  7 April 2026, 2:37 PM IST

Advertisement