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New Delhi: क्या आपने कभी सोचा है कि शादी के बाद महिलाओं की मांग में सजने वाला सिंदूर आखिर सिर्फ एक परंपरा है या इसके पीछे कोई कहानी भी छिपी है? लाल रंग की यह छोटी-सी रेखा सदियों से भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा रही है। इसे सुहाग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। शादी के समय जब दूल्हा दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है, तो उसी पल से यह उसके विवाहित होने की पहचान बन जाता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि सिंदूर लगाने की परंपरा की जड़ें पौराणिक कथाओं, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक रीति-रिवाजों से काफी जुड़ी हुई हैं। इतना ही नहीं, मांग में सिंदूर लगाने के धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक कारण भी हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में।
रामायण से लेकर महाभारत काल तक में सिंदूर का जिक्र किया गया है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सिंदूर का संबंध देवी पार्वती से माना जाता है, जिन्हें अखंड सौभाग्य का प्रतीक कहा जाता है। एक लोकप्रिय कथा के मुताबिक, देवी पार्वती ने अपने पति भगवान शिव की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए सिंदूर धारण किया था। तभी से विवाहित महिलाओं में यह परंपरा प्रचलित हो गई।
एक अन्य प्रसिद्ध कथा में बताया जाता है कि एक बार, जब माता सीता अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थीं, तब भगवान हनुमान ने उनसे पूछा, "आप यह सिंदूर क्यों लगाती हैं?" इसके उत्तर में सीता जी ने कहा, "मेरी मांग में यह सिंदूर देखकर भगवान श्री राम बहुत प्रसन्न होते हैं, इसीलिए मैं इसे लगाती हूं।" यह सुनकर हनुमान जी ने सोचा, "यदि माता सीता के थोड़ा-सा सिंदूर लगाने से ही भगवान राम इतने प्रसन्न होते हैं, तो मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाऊंगा, ताकि मुझे देखकर प्रभु और भी ज्यादा खुश हो जाएंगे।"
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार सिंदूर केवल धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा माना जाता है।
मान्यता है कि सिंदूर लगाने से मानसिक शांति बनी रहती है और स्ट्रेस कम करने में मदद मिलती है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखने में मददगार है।
लाल और नारंगी सिंदूर देखने में भले ही समान लगें, लेकिन इनके रंग, उपयोग और धार्मिक महत्व में अंतर होता है। लाल सिंदूर मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपनी मांग में लगाती हैं। वहीं नारंगी सिंदूर, जिसे पीला सिंदूर भी कहा जाता है, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में ज्यादा इस्तेमाल होता है। कई क्षेत्रों में विवाह से पहले दुल्हन को नारंगी सिंदूर लगाने की परंपरा भी है।
लाल रंग शक्ति और वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है, जबकि पीला रंग शुभता, समृद्धि और शुभ कार्यों का प्रतीक माना जाता है। समय के साथ पहनावे और लाइफस्टाइल में कई बदलाव आए हैं, लेकिन सिंदूर का महत्व आज भी बरकरार है।
Location : New Delhi
Published : 1 June 2026, 6:53 PM IST
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