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आईआईटी खड़गपुर से ग्रेजुएशन करने वाले प्रभाकर प्रसाद ने अमेरिका में नौकरी छूटने के बाद लॉस एंजिल्स में मसाला चाय का ठेला शुरू कर दिया। उनके स्टॉल पर एक कप चाय की कीमत 8 डॉलर यानी करीब 780 रुपये है।
बिहार के युवक ने अमेरिका में लगाया चाय का ठेला
New Delhi: IIT से पढ़ाई करने के बाद आमतौर पर लोग बड़ी कंपनियों में मोटी सैलरी वाली नौकरी करते हैं या फिर अपना स्टार्टअप शुरू करते हैं। लेकिन एक भारतीय IIT ग्रेजुएट ने बिल्कुल अलग रास्ता चुना और अब वह अमेरिका की सड़कों पर चाय बेचते नजर आ रहे हैं।
टेक सेक्टर में छंटनी के बाद नौकरी छूट गई तो उन्होंने हार मानने के बजाय लॉस एंजिल्स में चाय का ठेला लगा दिया। खास बात यह है कि उनके स्टॉल पर एक कप चाय की कीमत करीब 780 रुपये है और इसी वजह से वह इन दिनों सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में हैं।
बिहार से भोपाल और फिर IIT तक का सफर
प्रभाकर प्रसाद का परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है, लेकिन बाद में उनका परिवार मध्य प्रदेश के भोपाल में आकर बस गया। प्रभाकर की स्कूलिंग भी भोपाल में ही हुई। पढ़ाई में अच्छे होने के कारण उन्होंने आईआईटी खड़गपुर में दाखिला लिया और वहां से ग्रेजुएशन पूरा किया। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पारंपरिक करियर के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में हाथ आजमाने का फैसला किया।
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मुंबई में मॉडलिंग और बॉडी बिल्डिंग में आजमाया हाथ
ग्रेजुएशन के बाद प्रभाकर मुंबई चले गए, जहां उन्होंने बॉडी बिल्डिंग और मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बनाने की कोशिश की। हालांकि इस क्षेत्र में उन्हें खास सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने नया मौका तलाशने के लिए विदेश जाने का फैसला किया।
अमेरिका में नौकरी, फिर छंटनी का झटका
प्रभाकर अपनी गर्लफ्रेंड के पास अमेरिका के लॉस एंजिल्स चले गए और वहां कुछ समय तक नौकरी की। लेकिन साल 2025 में टेक सेक्टर में बड़े स्तर पर हुई छंटनी की लहर में उनकी नौकरी भी चली गई। नौकरी जाने के बाद कई लोग निराश हो जाते हैं, लेकिन प्रभाकर ने इसे एक नए मौके की तरह लिया और खुद का छोटा सा बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।
8 डॉलर की चाय बनी पहचान
प्रभाकर प्रसाद ने लॉस एंजिल्स में भारतीय मसाला चाय का ठेला शुरू कर दिया। उनके टी-स्टॉल की सबसे खास बात यह है कि यहां एक कप चाय की कीमत 8 डॉलर रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 780 रुपये के आसपास बैठती है। विदेश में भारतीय मसाला चाय का स्वाद लोगों को पसंद आ रहा है और यही वजह है कि उनका चाय का ठेला धीरे-धीरे लोकप्रिय होता जा रहा है। आज प्रभाकर की कहानी इस बात का उदाहरण बन गई है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हिम्मत और नया सोचने का जज्बा हो तो हर मुश्किल को मौके में बदला जा सकता है।