तेल की जंग में कौन बनेगा किंग! भारत की जेब पर मंडरा रहा खतरा? जानिए किस देश के हाथ में है तेल की चाबी

ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजर कच्चे तेल की सप्लाई पर टिकी है। अमेरिका उत्पादन में नंबर वन है, जबकि सऊदी अरब निर्यात में सबसे आगे माना जाता है। वहीं लीबिया दुनिया का ऐसा देश है जहां पेट्रोल सबसे सस्ते दामों पर मिलता है। भारत के लिए फिलहाल रूस सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना हुआ है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 13 March 2026, 2:56 PM IST
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New Delhi: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ती टकराव की खबरों ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। जैसे-जैसे युद्ध का खतरा गहराता है, वैसे-वैसे दुनिया की नजरें कच्चे तेल की सप्लाई पर टिक गई हैं। क्योंकि अगर तेल की सप्लाई में जरा सी भी रुकावट आई, तो उसका सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता और भी बड़ी है, क्योंकि यहां इस्तेमाल होने वाले करीब 85 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात विदेशों से होता है। ऐसे में खाड़ी देशों की हर हलचल भारत के पेट्रोल-डीजल के दामों पर असर डाल सकती है। लेकिन इस वैश्विक खेल में असली ताकत किन देशों के हाथ में है और दुनिया में कहां आज भी सबसे सस्ता पेट्रोल मिल रहा है, यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है।

दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश

अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के उत्पादन की बात करें तो आज के समय में अमेरिका सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है। साल 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका आधुनिक शेल तकनीक के दम पर दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बन चुका है। शेल तकनीक की मदद से अमेरिका जमीन के भीतर मौजूद उन तेल भंडारों को भी निकाल रहा है, जिन्हें पहले निकालना लगभग असंभव माना जाता था।

इसी वजह से अमेरिका ने उत्पादन के मामले में कई पारंपरिक तेल उत्पादक देशों को पीछे छोड़ दिया है। अमेरिका के बाद सऊदी अरब और रूस का नंबर आता है। ये तीनों देश मिलकर दुनिया के कुल कच्चे तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करते हैं। वैश्विक तेल बाजार में इन देशों का फैसला अक्सर कीमतों को ऊपर या नीचे ले जाता है।

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निर्यात के मामले में सऊदी अरब का दबदबा

हालांकि उत्पादन में अमेरिका आगे है, लेकिन निर्यात के मामले में सऊदी अरब आज भी दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सऊदी अरब की अपनी घरेलू खपत कम है और उसके पास विशाल तेल भंडार मौजूद हैं। यही कारण है कि सऊदी अरब दुनिया के कई देशों को बड़े पैमाने पर कच्चा तेल सप्लाई करता है। इसके अलावा इराक, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत भी बड़े निर्यातक देशों की सूची में शामिल हैं।

दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल कहां मिलता है

दुनिया में पेट्रोल की कीमत हर देश में अलग-अलग होती है। आम तौर पर जिन देशों के पास तेल के विशाल भंडार होते हैं और जहां सरकारें भारी सब्सिडी देती हैं, वहां पेट्रोल बेहद सस्ता मिलता है। मार्च 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक लीबिया दुनिया का वह देश है जहां पेट्रोल सबसे सस्ते दामों पर मिलता है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 0.024 डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 2.15 रुपये के आसपास है।

इसके बाद ईरान और वेनेजुएला का नाम आता है, जहां पेट्रोल की कीमत करीब 2.50 से 3 रुपये प्रति लीटर के बीच बताई जाती है। कुवैत और अंगोला जैसे देशों में भी पेट्रोल 30 रुपये प्रति लीटर से कम में उपलब्ध है। इन देशों में सरकारें तेल पर भारी सब्सिडी देती हैं, जिससे आम लोगों को बेहद कम कीमत पर पेट्रोल मिलता है।

भारत के लिए सबसे बड़ा तेल सप्लायर

वैश्विक तनाव और कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद रूस इस समय भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना हुआ है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले रूस से खरीद रहा है। रूस से मिलने वाला तेल अक्सर रियायती कीमतों पर मिलता है, जिससे भारत को बड़ी राहत मिलती है। इसके अलावा इराक और सऊदी अरब भी भारत के लिए महत्वपूर्ण सप्लायर बने हुए हैं। हालिया वैश्विक तनाव के बीच इन देशों ने भी भारत को तेल की सप्लाई बनाए रखने की कोशिश तेज कर दी है।

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संकट के समय काम आते हैं तेल भंडार

जब युद्ध या किसी अन्य वजह से समुद्री रास्ते बंद हो जाते हैं या तेल की सप्लाई बाधित हो जाती है, तब देशों के लिए स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व सबसे बड़ा सहारा बनते हैं। ये विशाल भंडार जमीन के नीचे बने बड़े टैंकों या गुफाओं में रखे जाते हैं, जहां महीनों तक तेल सुरक्षित रखा जा सकता है।

अमेरिका, चीन और जापान के पास दुनिया के सबसे बड़े रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं। इन देशों के पास इतना तेल जमा रहता है कि वे बिना आयात के करीब 100 से 200 दिनों तक अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं। भारत के पास फिलहाल करीब 10 से 12 दिनों का स्ट्रैटेजिक रिजर्व मौजूद है। हालांकि सरकार इस क्षमता को बढ़ाने के लिए नए भूमिगत भंडार बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

कच्चे तेल की उत्पादन लागत का बड़ा खेल

कच्चे तेल की कीमत तय करने में उत्पादन लागत भी अहम भूमिका निभाती है। अलग-अलग देशों में तेल निकालने की लागत अलग होती है। सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में तेल जमीन के काफी करीब मिलता है, इसलिए यहां तेल निकालना बेहद सस्ता पड़ता है। यहां एक बैरल तेल निकालने की लागत 10 डॉलर से भी कम होती है। इसके विपरीत अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में गहरी खुदाई और शेल तकनीक के कारण तेल निकालने की लागत 30 से 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है।

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  • New Delhi

Published : 
  • 13 March 2026, 2:56 PM IST

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