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ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने दुनिया भर के शेयर बाजारों और तेल की कीमतों को हिला दिया। लेकिन शुरुआती घबराहट के बाद अब बाजारों में सुधार दिखने लगा है। कई संकेत ऐसे मिल रहे हैं जो बताते हैं कि आने वाले दिनों में युद्ध को सीमित करने की कोशिश हो सकती है।
ईरान-इजरायल युद्ध (Img: Google)
New Delhi: मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया के आर्थिक माहौल को झकझोर दिया। हमलों और पलटवार की खबरों के बीच ग्लोबल शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। लेकिन शुरुआती घबराहट के बाद अब बाजारों का मूड धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। निवेशकों को लगने लगा है कि भले ही तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है लेकिन आने वाले दिनों में हालात काबू में आ सकते हैं।
दरअसल, इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान में बड़ा राजनीतिक झटका लगा और इसके बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और दूतावासों को निशाना बनाया। इसके साथ ही दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया। इस खबर से तेल बाजार में हड़कंप मच गया और ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
तेल की कीमतों में उछाल और युद्ध की आशंका के कारण ग्लोबल शेयर बाजारों में लगातार चार दिनों तक भारी गिरावट देखने को मिली। निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और हर कोई यही जानना चाहता था कि यह टकराव कब तक चलेगा।
हालांकि बुधवार से हालात कुछ बदलते नजर आए। कई बड़े वैश्विक बाजारों में अचानक तेजी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में करीब 9 से 10 फीसदी तक उछाल दर्ज किया गया। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई जहां नैस्डेक इंडेक्स में लगभग एक फीसदी की बढ़त देखी गई। इसके बाद जापान और चीन के बाजारों में भी तेजी लौट आई। भारतीय शेयर बाजार में भी गुरुवार को अच्छी मजबूती दिखाई दी।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलने की आशंका ज्यादा होती तो बाजारों में इतनी जल्दी भरोसा वापस नहीं आता।
एक और बड़ा संकेत कच्चे तेल की कीमतों से मिल रहा है। कुछ दिन पहले तक ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर के करीब पहुंच गया था, लेकिन अब यह लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों को बड़े स्तर पर तेल आपूर्ति रुकने का डर फिलहाल कम लग रहा है।
इसी तरह सोने और चांदी की कीमतों में भी पिछले दो दिनों में मुनाफावसूली देखी गई है। आम तौर पर युद्ध के समय निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं और सोने-चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। लेकिन अब इनकी कीमतों में दबाव दिखाई देना भी बाजार के शांत होने का संकेत माना जा रहा है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि लंबे समय तक युद्ध जारी रखना किसी भी पक्ष के लिए आसान नहीं होगा। कई वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े देश कूटनीतिक रास्तों से तनाव कम कराने की कोशिश करेंगे। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह संघर्ष कुछ हफ्तों तक चल सकता है, लेकिन बाजार के संकेत बताते हैं कि निवेशकों को उम्मीद है कि स्थिति जल्द नियंत्रण में आ सकती है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगा कि युद्ध पूरी तरह खत्म होने वाला है, लेकिन बाजारों की चाल से इतना जरूर लगता है कि दुनिया इस टकराव को लंबा खिंचने नहीं देना चाहती।