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सुप्रीम कोर्ट (Img: Google)
वर्ष 2016 में लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में प्रजनन स्वास्थ्य के प्रोफेसर जॉन गिलेबॉड ने बताया था कि कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान उतना ही दर्द महसूस होता है जितना हार्ट अटैक के समय होता है। वहीं, वर्ष 2012 में डिस्मेनोरिया पर हुए एक शोध में पाया गया कि करीब 20 प्रतिशत महिलाएं पीरियड्स के दौरान इतनी तकलीफ में होती हैं कि उनके लिए चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है। एक अन्य अध्ययन के अनुसार पीरियड्स के दर्द की वजह से काम से जुड़ी उत्पादकता में औसतन 33 प्रतिशत तक की कमी देखी गई, जो साल में लगभग 9 दिन के काम के बराबर मानी जाती है।
भारत में कहां-कहां मिलती है पीरियड लीव?
भारत में सबसे पहले बिहार ने 2 जनवरी 1992 से महिला कर्मचारियों को दो दिन की पीरियड लीव देने की शुरुआत की थी। इसके लिए महिला कर्मचारियों ने करीब 32 दिनों तक हड़ताल भी की थी। उस समय लालू प्रसाद यादव की सरकार ने यह व्यवस्था लागू की थी।
इसके बाद निजी क्षेत्र में भी कुछ कंपनियों ने पहल की। साल 2017 में मुंबई की कंपनी कल्चर मशीन ने एक दिन की पीरियड लीव देना शुरू किया। 2020 में फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो ने भी अपने कर्मचारियों के लिए पीरियड लीव का ऐलान किया। आज देश में करीब एक दर्जन कंपनियां जैसे बायजू, स्विगी, मातृभूमि, वेट एंड ड्राई और मैगज्टर अपने कर्मचारियों को यह सुविधा दे रही हैं। हाल ही में केरल सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले विश्वविद्यालयों की छात्राओं को भी पीरियड लीव देने का फैसला लिया है।
विशेषज्ञों का क्या कहना है
महिला अधिकार कार्यकर्ता ऋचा सिंह के अनुसार, वैज्ञानिक नजरिए से महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान आराम की जरूरत होती है। इस समय पीसीओडी, एंडोमेट्रायोसिस या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में महिलाओं को अपने शरीर को समय देने का अधिकार होना चाहिए।
मनोचिकित्सक मनीला बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान कई महिलाएं मानसिक तनाव, मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं से गुजरती हैं। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में 2021 में हुए एक सर्वे में पाया गया कि 70 प्रतिशत महिलाएं अपने मैनेजर से पीरियड्स के बारे में बात करने में असहज महसूस करती हैं।
Location : New Delhi
Published : 13 March 2026, 2:15 PM IST