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संघर्ष और वैश्विक तेल-गैस संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 को लागू कर दिया है। इस फैसले के बाद पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से जुड़ी सभी कंपनियों के लिए सरकार के साथ नियमित रूप से डेटा साझा करना अनिवार्य हो गया है।
प्रतीकात्मक छवि (Img: Google)
New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक तेल-गैस संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 को लागू कर दिया है। इस फैसले के बाद पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस से जुड़ी सभी कंपनियों के लिए सरकार के साथ नियमित रूप से डेटा साझा करना अनिवार्य हो गया है।
सरकार के इस आदेश के तहत उत्पादन, प्रसंस्करण, शोधन, भंडारण, आयात-निर्यात, मार्केटिंग और उपभोग से जुड़ी कंपनियों को अपनी ताजा जानकारी पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) को देनी होगी।
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पीपीएसी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत काम करने वाला प्रमुख डेटा संग्रहण और विश्लेषण विभाग हैं। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, सरकार ने राजपत्र अधिसूचना जारी कर पीपीएसी को सूचना एकत्र करने, संकलन, रखरखाव और विश्लेषण करने वाली आधिकारिक एजेंसी के रूप में नामित किया है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से आपात स्थिति में बेहतर योजना बनाने और आपूर्ति प्रबंधन में मदद मिलेगी। खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है।
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महत्वपूर्ण बात यह है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 के तहत जारी आदेश का उल्लंघन दंडनीय अपराध माना जाएगा। नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जेल की सजा का भी प्रावधान है। सरकार के इस फैसले को ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार को यह शक्ति देता है कि वे नागरिकों को उचित कीमतों पर जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करे। साथ ही जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम तौर पर चीजों की कमी पैदा होने से रोके। एक तरह से यह कानून, देश में खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में मददगार है।
इस कानून की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार जरूरी चीजों के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है। सरकार स्टॉक सीमा लगा सकती है और व्यापार को भी विनयमित कर सकती है। कीमतें तय कर सकती है और जमाखोरी पर रोक लगा सकती है।