समुद्र से उठता है, हिमालय से टकराता है… आखिर कैसे पूरे भारत को भिगोता है मानसून?

भारत में मानसून की दस्तक हो चुकी है। करोड़ों लोगों को गर्मी से राहत देने वाला मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि प्रकृति का एक विशाल वैज्ञानिक चमत्कार है।

Updated : 9 June 2026, 4:35 PM IST
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New Delhi:   भारत में मानसून की दस्तक हो चुकी है। करोड़ों लोगों को गर्मी से राहत देने वाला मानसून सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि प्रकृति का एक विशाल वैज्ञानिक चमत्कार है। हर साल जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश के पीछे हजारों किलोमीटर लंबी यात्रा, समुद्री हवाओं का दबाव और हिमालय की अहम भूमिका छिपी होती है।

सूर्य की तीव्र गर्मी

बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में बरसने वाला मानसून वास्तव में हिंद महासागर के ऊपर जन्म लेता है। गर्मियों में सूर्य की तीव्र गर्मी के कारण भारतीय उपमहाद्वीप का तापमान तेजी से बढ़ जाता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, जबकि समुद्र अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। इस तापमान अंतर के कारण कम दबाव का क्षेत्र बनता है, जो समुद्र से नमी से भरी हवाओं को भारत की ओर खींच लाता है।

भारी मात्रा में जलवाष्प

मानसूनी हवाएं विषुवत रेखा पार कर दक्षिणी गोलार्ध से उत्तर की ओर बढ़ती हैं। रास्ते में ये अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में जलवाष्प अपने साथ ले लेती हैं। यही नमी बाद में पूरे देश में बारिश के रूप में गिरती है। भारत पहुंचने के बाद मानसून दो प्रमुख शाखाओं में बंट जाता है। पहली शाखा अरब सागर से होकर केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान की ओर बढ़ती है। दूसरी शाखा बंगाल की खाड़ी से पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत तक पहुंचती है।

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सबसे बड़ा हीरो हिमालय

लेकिन इस पूरी प्रक्रिया का सबसे बड़ा हीरो हिमालय है। यदि हिमालय पर्वत श्रृंखला न होती, तो मानसूनी हवाएं सीधे मध्य एशिया की ओर निकल जातीं और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में आज जैसी बारिश शायद कभी नहीं होती। हिमालय इन हवाओं को रोकता है, जिससे नमी से भरे बादल ऊपर उठते हैं और भारी वर्षा होती है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की यात्रा मई में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से शुरू होती है। इसके बाद यह 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है और जुलाई के पहले सप्ताह तक लगभग पूरे भारत को कवर कर लेता है।

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दिलचस्प बात यह है कि जिस राजस्थान में मानसून की पहुंच सबसे आखिर में होती है, वहीं से इसकी वापसी भी शुरू होती है। सितंबर के अंत और अक्टूबर में मानसून सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान से लौटना शुरू करता है और धीरे-धीरे पूरे देश से विदा हो जाता है। यानी भारत में होने वाली हर बारिश के पीछे समुद्र, सूर्य, हवाएं और हिमालय मिलकर काम करते हैं। यही कारण है कि मानसून को भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और करोड़ों लोगों की जिंदगी की जीवनरेखा कहा जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  9 June 2026, 4:35 PM IST

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