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हिमंत बिस्वा सरमा दूसरी बार बने मुख्यमंत्री (Img: Google)
Assam Politics: असम की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। गुवाहाटी में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में हिमंत बिस्वा सरमा ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन इस समारोह में सिर्फ शपथ ही नहीं, कई ऐसे सियासी संकेत भी दिखाई दिए जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
असम विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। इसके साथ ही वह राज्य के पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं जिन्होंने लगातार दो कार्यकाल तक मुख्यमंत्री पद हासिल किया है। गुवाहाटी में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
समारोह बेहद भव्य और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत भाजपा और एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहे। कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में पहुंचे।
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हिमंत बिस्वा सरमा की दूसरी पारी कई मायनों में खास मानी जा रही है। असम में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का यह लगातार तीसरा कार्यकाल है। साल 2016 में भाजपा ने पहली बार असम में सरकार बनाई थी, तब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद 2021 में हिमंत बिस्वा सरमा को राज्य की कमान सौंपी गई और अब 2026 में उन्होंने फिर से सत्ता में वापसी की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में भाजपा की मजबूत पकड़ बनाने में हिमंत बिस्वा सरमा की रणनीति और संगठन क्षमता की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा के विस्तार में अहम योगदान दिया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ कई वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इनमें रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, चरन बोरो और अजंता नियोग प्रमुख रहे। इन मंत्रियों के चयन को सामाजिक और राजनीतिक संतुलन के नजरिए से भी देखा जा रहा है। भाजपा ने सहयोगी दलों और विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। खासतौर पर बीपीएफ नेता चरन बोरो को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। कभी कांग्रेस के मजबूत नेताओं में गिने जाने वाले सरमा ने साल 2015 में पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। उस समय असम में कांग्रेस की स्थिति मजबूत थी और भाजपा के पास बहुत कम सीटें थीं। लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद हिमंत सरमा ने जिस तरह रणनीतिक तरीके से काम किया, उसने पूर्वोत्तर की राजनीति की तस्वीर बदल दी। 2016 में उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस यानी NEDA का संयोजक बनाया गया। इसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय दलों को भाजपा के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
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आज पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं और इसके पीछे हिमंत बिस्वा सरमा की राजनीतिक रणनीति को बड़ा कारण माना जाता है।
हिमंत बिस्वा सरमा का जन्म असम में हुआ और उनकी शुरुआती शिक्षा गुवाहाटी में हुई। उन्होंने कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की और कुछ समय तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत भी की। उनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1991-92 में वह कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव रहे। बाद में उन्होंने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) से जुड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
साल 2001 में उन्होंने जालुकबारी विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीता। खास बात यह है कि वह इस सीट से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं।
Location : Dispur
Published : 12 May 2026, 2:46 PM IST