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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प (image source: internet)
New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने सोमवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ईरान के शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ईरान की ओर से भेजा गया प्रस्ताव “कचरा” है और वह उसे पूरा पढ़ भी नहीं पाए।
ट्रंप ने कहा कि मौजूदा सीजफायर बेहद कमजोर स्थिति में है और "लाइफ सपोर्ट" पर टिका हुआ है। उन्होंने दावा किया कि ईरान इस समय पहले से काफी कमजोर स्थिति में है और अमेरिका जरूरत पड़ने पर उसकी किसी भी सैन्य तैयारी को बहुत कम समय में खत्म कर सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान जैसे "अस्थिर" देश को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते। उनके अनुसार, यदि ईरान परमाणु शक्ति हासिल करता है तो यह पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
ट्रंप ने हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को "रणनीतिक सफलता" बताते हुए कहा कि अमेरिका के पास अब पहले से ज्यादा आधुनिक हथियार और गोला-बारूद मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले के मुकाबले कमजोर हुई है।
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अपने बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि हालिया हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका से परमाणु साइट को लेकर मदद मांगी थी। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने बताया कि वहां "न्यूक्लियर डस्ट" जैसी गंभीर स्थिति बन गई है और प्रभावित क्षेत्र को साफ करना उनके लिए संभव नहीं है।
ट्रंप ने दावा किया कि केवल अमेरिका और चीन के पास इतनी तकनीक और संसाधन हैं कि वे इस स्तर की जटिल स्थिति को संभाल सकते हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों बराक ओबामा और जो बिडेन का नाम लेते हुए कहा कि शायद वे इस तरह के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते, लेकिन मौजूदा प्रशासन ऐसा नहीं करेगा।
वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी अपने रुख को लेकर सख्ती दिखाई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने कहा कि 14-सूत्रीय प्रस्ताव ही एकमात्र व्यवहारिक समाधान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे को लंबा खींचा गया तो इसका आर्थिक बोझ अमेरिका के करदाताओं पर पड़ेगा।
इसी बीच ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने साफ कर दिया कि किसी भी संभावित बातचीत में यूरेनियम संवर्धन और परमाणु तकनीक का मुद्दा शामिल नहीं होगा। ईरान का कहना है कि बातचीत केवल क्षेत्रीय संघर्ष और युद्ध समाप्त करने तक सीमित रहनी चाहिए।
दोनों देशों के तीखे बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। फिलहाल किसी आधिकारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बढ़ती बयानबाजी ने मध्य पूर्व की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
Location : New Delhi
Published : 12 May 2026, 2:59 PM IST