“मेरे चैंबर से बाहर निकल जाओ…” CJI सूर्यकांत ने सुनाया संघर्ष का किस्सा, कोर्टरूम में छा गया सन्नाटा

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने अपनी जिंदगी का बेहद भावुक और प्रेरणादायक किस्सा साझा किया। न्यायिक सेवा परीक्षा से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि कैसे एक जज की सलाह ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 8 May 2026, 7:01 PM IST
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में उस समय माहौल भावुक हो गया, जब न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी प्रेरणा गुप्ता की याचिका पर सुनवाई हो रही थी। प्रेरणा ने अपनी उत्तर पुस्तिका के रीवैल्यूएशन की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने अपने शुरुआती संघर्षों का जिक्र करते हुए ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने कोर्टरूम में मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।

“मुझे लगा मेरा करियर खत्म हो गया”

सीजेआई ने बताया कि वर्ष 1984 में कानून की पढ़ाई के अंतिम वर्ष के दौरान उन्होंने न्यायिक सेवा परीक्षा दी थी। लिखित परीक्षा पास करने के बाद वे इंटरव्यू की तैयारी कर रहे थे। उसी समय उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत भी शुरू की थी।

उन्होंने बताया कि इंटरव्यू पैनल में वही वरिष्ठ जज शामिल थे, जिनके सामने वह हाल ही में दो बड़े मामलों में बहस कर चुके थे। इंटरव्यू से पहले जज ने उन्हें अपने चैंबर में बुलाया और पूछा कि क्या वह न्यायिक अधिकारी बनना चाहते हैं।

जब उन्होंने “हां” कहा तो जज ने तुरंत कहा -“मेरे चैंबर से बाहर निकल जाओ।”

सीजेआई ने कहा कि उस पल उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो गया है। वे कांपते हुए चैंबर से बाहर निकले थे।

एक सलाह ने बदल दी जिंदगी

हालांकि अगले ही दिन वही जज फिर से उन्हें बुलाते हैं और सलाह देते हैं कि यदि चाहें तो जज बन सकते हो, लेकिन बार में  ज्यादा संभावनाएं हैं। CJI Surya Kant ने बताया कि उन्होंने उस सलाह को गंभीरता से लिया और इंटरव्यू छोड़कर पूरी तरह वकालत पर ध्यान देना शुरू कर दिया। यहां तक कि शुरुआत में उन्होंने यह बात अपने माता-पिता को भी नहीं बताई थी।

सुनवाई के दौरान उन्होंने प्रेरणा गुप्ता से मुस्कुराते हुए पूछा - “अब बताइए, मैंने सही फैसला लिया या गलत?” इसके बाद सीजेआई ने कहा कि जिंदगी को किसी एक परीक्षा या उत्तरपुस्तिका तक सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने युवाओं को भविष्य की ओर देखने और नए अवसर तलाशने की सलाह दी।

याचिका भले ही खारिज हो गई, लेकिन अदालत से बाहर निकलते समय प्रेरणा गुप्ता के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी।

Location :  New Delhi

Published :  8 May 2026, 6:58 PM IST

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