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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (सोर्स: डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जजों की संख्या बढ़ाई गई है। इसको लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने कहा है कि यह एक उचित और बड़ा फैसला है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जजों की संख्या बढ़ाने के लिए कानून में आवश्यक संशोधन किया जाता है तो इससे लंबित मामलों के निपटारे में निश्चित रूप से तेजी आएगी। खासकर वे मामले जो संवैधानिक पीठ की प्रतीक्षा में हैं, उनमें सुनवाई की गति बढ़ेगी और न्याय प्रणाली अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगी।
जाति भेदभाव को लेकर क्या बोले?
रामधारी सिंह दिनकर को याद करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, "हमारे देश में जाति का भेदभाव आज भी खत्म नहीं हुआ है, अगर जाति भेदभाव नहीं होता तो कोर्ट-कचहरी में इतने मामले नहीं आते।" उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की प्रमुख कविता में शामिल रश्मिरथी का जिक्र किया।
कार्यक्रम में ये लोग भी मौजूद रहे
दिल्ली में स्थित भीम ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर को याद करते हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रोफेसर रामेश्वर राय, डॉ विकास सिंह, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और भाजपा के सांसद मनोज तिवारी समेत काफी लोग मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में मनोज तिवारी को "दिनकर संस्कृति सम्मान" से सम्मानित किया गया।
दिल्ली : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने केंद्रीय संविधान के फैसले का स्वागत किया।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 34 से 38 करने को महत्वपूर्ण कदम बताया। कहा- बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने और सतत संवैधानिक पीठ को संचालित करने में मिलेगी मदद#SupremeCourt… pic.twitter.com/TmUZqQSa6q
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) May 6, 2026
मुख्य न्यायाधीश ने और क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश ने इस दौरान मंच के माध्यम से कहा, "जितने भी देश में रचनाकार हैं, उन्होंने समाज निर्माण में एक अहम योगदान दिया है। हमारा सिर तब ऊंचा होता है, जब हमारा समाज में सम्मान होता है।"
जजों की संख्या बढ़ाने पर क्या बोले मुख्य न्यायाधीश?
भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के केंद्र सरकार के फैसले पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि यह कदम न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बेहद जरूरी था। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही नए मामलों के दाखिल होने की रफ्तार भी साल-दर-साल तेजी से बढ़ती जा रही है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने जजों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए एक कानूनी प्रावधान तैयार किया जाएगा और उन्हें पूरा भरोसा है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक अहम टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या जन्म के आधार पर भेदभाव उचित है।, सुनिए क्या कहा?#SuryaKant #CJI #SupremeCourt #Equality pic.twitter.com/yNMwURdFHR
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अहम मामलों का समय पर निपटारा बेहद जरूरी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आगे कहा कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त जजों की वास्तविक जरूरत महसूस की जा रही है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण मामले ऐसे हैं जिनकी सुनवाई के लिए संवैधानिक पीठ की आवश्यकता होती है, लेकिन वे अभी भी लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील और अहम मामलों का समय पर निपटारा बेहद जरूरी है ताकि न्याय प्रक्रिया में किसी तरह की देरी न हो। इसके लिए यह भी जरूरी है कि एक समर्पित संवैधानिक पीठ लगातार सक्रिय रूप से काम करती रहे।
याद की अपने पिताजी की बात
सूर्यकांत ने अपने पिता के बारे में जिक्र करते हुए कहा, "मेरे पिताजी ने कहा था कि तुम अगर न्याय और समाज कल्याण के लिए पढ़ना चाहते हो तो दिनकर को पढ़ो।" सीजेआई सूर्यकांत ने आगे कहा, "समानता सबका मौलिक अधिकार है।"
Location : New Delhi
Published : 6 May 2026, 8:51 PM IST