सिंगापुर कोर्ट का फैसला छिपाकर बेटी की कस्टडी मांगने पहुंची मां, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दी याचिका

बेटी की कस्टडी पाने के लिए मां ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सुनवाई के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पूरे मामले का रुख बदल दिया। अदालत ने पाया कि विदेश में चल रही न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी अहम जानकारी साझा नहीं की गई थी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 15 June 2026, 5:14 PM IST
google-preferred

New Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अंतरराष्ट्रीय बाल कस्टडी विवाद में मां की ओर से दाखिल हेबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों और विदेशी अदालत में चल रही कार्यवाही की जानकारी छिपाई, जिससे यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं रह गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में सभी तथ्यों को पूरी पारदर्शिता के साथ रखना आवश्यक है।

बच्ची की कस्टडी को लेकर चल रहा विवाद

मामला चार वर्षीय बच्ची की कस्टडी से जुड़ा है, जिसका जन्म और पालन-पोषण सिंगापुर में हुआ। बच्ची की मां सोम्या गोयल ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनके साथ वैवाहिक जीवन में क्रूरता हुई और बच्ची की देखभाल को लेकर भी गंभीर लापरवाही बरती गई। उन्होंने अदालत से बच्ची को भारत लाने और उसकी कस्टडी देने की मांग की थी।

कोर्ट में तारीख पर पहुंची महिला पर क्यों बरसा कहर? फरसा-रॉड से हमले में 3 घायल, सैफई तक पहुंचा मामला

हालांकि सुनवाई के दौरान मामले में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने अदालत का ध्यान अपनी ओर खींचा। विशेष रूप से यह बात सामने आई कि इसी विवाद को लेकर सिंगापुर की अदालत में पहले से कार्यवाही चल चुकी थी और वहां आदेश भी पारित किए जा चुके थे।

सिंगापुर कोर्ट के आदेश का नहीं किया जिक्र

सुनवाई के दौरान बच्ची के पिता की ओर से अदालत को बताया गया कि सिंगापुर की फैमिली जस्टिस कोर्ट इस मामले पर पहले ही फैसला दे चुकी है। नवंबर 2025 में दिए गए आदेश में मां की बच्ची को भारत लाने संबंधी मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। अदालत के समक्ष यह भी रखा गया कि बच्ची ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित है और सिंगापुर में उसे विशेष चिकित्सा सुविधाएं, देखभाल और शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहां उसके स्वास्थ्य और विकास को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

बच्ची के हित को सर्वोपरि मानते हुए फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि बाल कस्टडी मामलों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बच्चे का हित होता है। अदालत ने पाया कि बच्ची को वर्तमान में आवश्यक चिकित्सा और शैक्षणिक सहायता मिल रही है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था में हस्तक्षेप करना उसके हित में नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने विदेशी अदालत में चल रही कार्यवाही और वहां पारित आदेशों का खुलासा नहीं किया।

एनएच-28 पर मौत बनकर दौड़ा गैस सिलेंडर ट्रक… एक पल की चूक और हाईवे पर मच गया हड़कंप

हाईकोर्ट ने दी अहम टिप्पणी

अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि हेबियस कॉर्पस याचिका का उद्देश्य किसी व्यक्ति की अवैध हिरासत को चुनौती देना होता है। बाल कस्टडी से जुड़े जटिल और विस्तृत विवादों की सुनवाई के लिए फैमिली कोर्ट अधिक उपयुक्त मंच है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कई तथ्यात्मक पहलुओं की गहन जांच आवश्यक होती है, जो हेबियस कॉर्पस याचिका के सीमित दायरे में संभव नहीं है। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।

Location :  New delhi

Published :  15 June 2026, 5:14 PM IST

Related News

Advertisement