प्रोजेक्ट शिशु के मुरीद हुए CJI सूर्यकांत, राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार का दिया भरोसा; जानिए क्या है यह पहल

देवघर पहुंचे CJI न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने झालसा के प्रोजेक्ट शिशु की सराहना की। उन्होंने नालसा के माध्यम से अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के पुनर्वास की इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की बात कही।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 2 November 2026, 8:05 PM IST
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Deoghar: अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर झारखंड में चल रही एक पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकती है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत देवघर पहुंचे तो झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की ओर से संचालित 'प्रोजेक्ट शिशु' ने उनका ध्यान खींचा। इस परियोजना के कामकाज और उद्देश्य से प्रभावित सीजेआई ने इसकी सराहना की और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) के माध्यम से इसे देशभर में विस्तार देने की दिशा में पहल करने की बात कही। उनका यह भरोसा उन बच्चों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, जिन्हें परिवार और समाज के सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत है।

बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद व्यवहार न्यायालय पहुंचे CJI

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपने देवघर दौरे के दौरान सबसे पहले बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान के साथ बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना की और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में दर्शन और पूजन के बाद उनका काफिला देवघर व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंचा। यहां राज्यस्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तीकरण शिविर का आयोजन किया गया था।

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लोकनृत्य और ढोल-नगाड़ों से हुआ भव्य स्वागत

व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंचने पर सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत का स्वागत झारखंड की पारंपरिक आदिवासी संस्कृति के अनुरूप किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अतिथियों का अभिनंदन किया। इस दौरान पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। पारंपरिक नृत्य और संगीत के जरिए झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक पेश की गई।

प्रोजेक्ट शिशु ने खींचा CJI का ध्यान

राज्यस्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तीकरण शिविर के दौरान झालसा की ओर से संचालित 'प्रोजेक्ट शिशु' विशेष चर्चा में रहा। यह परियोजना अनाथ, बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास और बेहतर भविष्य के लिए काम करती है। इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों को जरूरी सहयोग उपलब्ध कराना है, जिन्हें पारिवारिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण उचित देखभाल और संरक्षण नहीं मिल पाता। सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने परियोजना के उद्देश्य और इसके सामाजिक महत्व की सराहना की। उन्होंने इसे बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया।

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प्रोजेक्ट शिशु के मुरीद हुए CJI सूर्यकांत (IMG: Dynamite News)

पूरे देश तक पहुंच सकती है प्रोजेक्ट शिशु की पहल

प्रोजेक्ट शिशु की उपयोगिता को देखते हुए सीजेआई ने इसके राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की संभावना पर भी जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (नालसा) के माध्यम से इस परियोजना को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में पहल करने की बात कही। अगर इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया जाता है तो झारखंड में संचालित इस पहल का लाभ दूसरे राज्यों के अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को भी मिल सकता है। इससे बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए व्यापक स्तर पर काम करने का रास्ता खुल सकता है।

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विधिक सेवा शिविर से बच्चों के भविष्य का संदेश

देवघर व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तीकरण शिविर में प्रोजेक्ट शिशु की चर्चा ने सामाजिक संरक्षण और बच्चों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को न्यायिक एवं सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने में विधिक सेवा संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

Location :  Deoghar

Published :  2 November 2026, 8:04 PM IST

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