आवाज नहीं सुनी गई तो शराब के ठेके पर महिलाओं ने बोला हल्ला, हंगामा मचाने के बाद की तोड़फोड़

झांसी में हाथों में लाठी-डंडे लेकर पहुंचीं महिलाओं ने देशी शराब के ठेके पर जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। शराब के पाउच और पेटियों को उठाकर फेंका, पैरों से कुचला और अपना आक्रोश जाहिर किया

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 2 November 2026, 7:59 PM IST
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Jhansi: झांसी में जगह-जगह खुले देशी शराब के ठेके अब लोगों के लिए परेशानी बनते जा रहे हैं। कहीं शराब की लत परिवारों को बर्बाद कर रही है, तो कहीं युवाओं की जिंदगी निगल रही है। जिम्मेदारों से बार-बार शिकायत करने के बावजूद जब महिलाओं की आवाज नहीं सुनी गई, तो आखिरकार महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। हाथों में लाठी-डंडे लेकर पहुंचीं महिलाओं ने देशी शराब के ठेके पर जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। शराब के पाउच और पेटियों को उठाकर फेंका, पैरों से कुचला और अपना आक्रोश जाहिर किया। सवाल यह है कि आखिर महिलाओं को कानून हाथ में लेने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा?

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लाठी-डंडे लेकर महिलाओं ने की जमकर तोड़फोड़ (IMG-DYNAMITE NEWS)

शराब की लत ने उजाड़े कई परिवार

पूरा मामला झांसी के गुरसराय थाना क्षेत्र के नारायणपुरा मोहल्ले का है। यहां प्रिंस अग्रवाल के नाम से देशी शराब का ठेका संचालित है। मोहल्ले में शराब का ठेका होने से नाराज महिलाओं का आरोप है कि शराब की लत ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। उनके मुताबिक, करीब दस नौजवान शराब की लत के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं। कई घरों में पत्नियां विधवा हो गईं और बच्चे पिता के साये से महरूम हो गए।

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महिलाओं का कहना है कि मोहल्ले में शराब का ठेका हटवाने के लिए कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। शिकायतें होती रहीं, आश्वासन मिलते रहे, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।

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महिलाएं को कानून हाथ में लेने के लिए मजबूर

आखिरकार सब्र का बांध टूट

मोहल्ले की महिलाएं एकजुट होकर लाठी-डंडे लेकर शराब के ठेके पर पहुंच गईं। इसके बाद शुरू हुआ हंगामा और तोड़फोड़ का दौर। ठेके में रखे देशी शराब के पाउच और पेटियों को बाहर निकालकर तहस-नहस किया गया। महिलाओं ने शराब के पाउच पैरों से कुचल दिए और ठेके के खिलाफ जमकर अपना गुस्सा जाहिर किया।

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सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच- पड़ताल शुरू कर दी। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हुई है।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने जिम्मेदार प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर महिलाओं की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती, तो क्या आज उन्हें इस तरह सड़क पर उतरकर विरोध करना पड़ता? आखिर मोहल्लों के बीच शराब के ठेकों के संचालन की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है? क्या आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन को उन परिवारों की बर्बादी दिखाई नहीं देती, जो शराब की लत का दंश झेल रहे हैं? सवाल सिर्फ एक ठेके का नहीं, उन तमाम परिवारों का है जिनकी खुशियां शराब की भेंट चढ़ रही हैं। अब देखना होगा कि महिलाओं के इस विरोध के बाद जिम्मेदार महकमे की नींद टूटती है या फिर शिकायतों की फाइलें एक बार फिर धूल फांकती रहेंगी।  

Location :  Jhansi

Published :  2 November 2026, 7:59 PM IST

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