Chaibasa: गांव की सहमति के बिना कैसे तय हुई जमीन? सलिगुटू में पुनर्वास को लेकर भड़का विरोध, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

चाईबासा के सलिगुटू गांव में पुनर्वास के लिए लगभग 3 एकड़ जमीन के चयन पर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। आरोप है कि यह चयन बिना ग्राम सभा की सहमति के हुआ। ग्रामीणों ने इसे पेसा कानून का उल्लंघन बताते हुए प्रशासन से पुनर्विचार और कार्रवाई की मांग की है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 15 June 2026, 6:59 PM IST
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Chaibasa: पश्चिम सिंहभूम जिले के खुंटपानी प्रखंड अंतर्गत केयडचलोम पंचायत के सलिगुटू गांव में पुनर्वास के लिए जमीन चयन किए जाने का ग्रामीणों ने विरोध किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा बिना ग्राम सभा और आमसभा की सहमति के लगभग 3 एकड़ 8 डिसमिल जमीन का चयन कर लिया गया है।

ग्राम सभा में हुई विस्तृत चर्चा

मामले को लेकर सोमवार को सलिगुटू गांव में ग्रामीण मुंडा सुखदेव हेम्बरम की अध्यक्षता में ग्राम सभा आयोजित की गई। ग्राम सभा में गांव के महिला-पुरुष, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में पुनर्वास के लिए जमीन चयन किए जाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। ग्रामीणों के सुझाव के लिए खुंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा को भी ग्राम सभा में आमंत्रित किया गया।

ग्रामीणों ने चयन का किया विरोध

ग्राम सभा में ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि किसी भी परिस्थिति में पुनर्वास के लिए जमीन नहीं दी जाएगी। ग्रामीणों का कहना था कि बिना ग्राम सभा और आमसभा की सहमति के जमीन चयन करने का निर्णय गलत है। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े किसी भी निर्णय में ग्रामीणों की भागीदारी जरूरी है।

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ग्राम सभा में हुई विस्तृत चर्चा

प्रखंड प्रमुख ने प्रशासन पर उठाए सवाल

इस दौरान खुंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी जमीन को पुनर्वास के लिए चयन करने से पहले अंचल अधिकारी द्वारा लिखित रूप से ग्रामीण मुंडा को सूचना दी जाती है, लेकिन इस मामले में ग्रामीण मुंडा को कोई लिखित सूचना नहीं दी गई। उन्होंने इसे जिला प्रशासन की बड़ी चूक बताया।

पेसा कानून और ग्राम सभा के अधिकार

प्रखंड प्रमुख ने कहा कि पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। ग्राम सभा की सहमति के बिना जमीन का निरीक्षण और चयन करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विलकिंसन रूल के अनुसार मुंडा-मानकी को भी सूचना देना आवश्यक है। ग्राम सभा की सहमति के बाद ही पुनर्वास के लिए जमीन को लेकर आगे की प्रक्रिया होनी चाहिए।

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ग्रामीणों की चेतावनी

ग्रामीणों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन उनकी पूर्वजों की धरोहर है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी ग्राम सभा की है। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले पर दोबारा विचार करने और स्थानीय मुंडा-मानकी को सूचना देकर आगे की कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो पुनर्वास के विरोध में आंदोलन किया जाएगा।

Location :  Chaibasa

Published :  15 June 2026, 6:56 PM IST

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