Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर बदलता भक्ति का स्वरूप, जानें क्यों शोर को छोड़ साइलेंट साधना की ओर बढ़ रहे श्रद्धालु

महाशिवरात्रि पर इस बार भक्ति का स्वरूप बदलता दिख रहा है। डीजे और शोर से दूर श्रद्धालु मौन, ध्यान और आत्मचिंतन के जरिए शिव से जुड़ रहे हैं। साइलेंट भक्ति को लोग मानसिक शांति और सच्ची आस्था का मार्ग मान रहे हैं।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 30 January 2026, 1:06 PM IST
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New Delhi: महाशिवरात्रि पर भक्ति का स्वरूप अब धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। जहां पहले इस पर्व को ढोल, डीजे, तेज भजनों और बड़े जुलूसों के साथ मनाने का चलन था, वहीं अब बड़ी संख्या में श्रद्धालु शांति, मौन और ध्यान के रास्ते शिव से जुड़ने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसे “साइलेंट भक्ति” कहा जा रहा है, जो खासतौर पर युवाओं और शहरी वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

मौन में शिव की अनुभूति

इस साल कई शिव मंदिरों और आश्रमों में एक अलग दृश्य देखने को मिला। भक्त बिना शोर-शराबे के, आंखें बंद किए ध्यान में लीन दिखे। मंत्र जप धीमी आवाज में किया गया और अभिषेक भी शांत वातावरण में संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान शिव ध्यान और समाधि के देवता हैं, इसलिए मौन में की गई साधना उनसे जुड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।

डीजे संस्कृति से बन रही दूरी

पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक आयोजनों में डीजे और तेज संगीत आम हो गया था, लेकिन अब इसी पर सवाल उठने लगे हैं। कई युवाओं का कहना है कि तेज आवाज और भीड़ में भक्ति की जगह सिर्फ शोर रह जाता है। इसी सोच के चलते कई स्थानों पर डीजे और लाउडस्पीकर का उपयोग सीमित किया गया या पूरी तरह बंद रखा गया। भक्त शांत माहौल में पूजा कर ज्यादा एकाग्रता महसूस कर रहे हैं।

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मानसिक शांति की तलाश में साइलेंट भक्ति

तेज रफ्तार जिंदगी, काम का दबाव, सोशल मीडिया और डिजिटल थकान के बीच महाशिवरात्रि अब केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानसिक शांति की रात भी बनती जा रही है। लोग इसे खुद से जुड़ने, भीतर झांकने और तनाव से बाहर निकलने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। साइलेंट भक्ति को कई लोग एक तरह का मानसिक डिटॉक्स मानते हैं, जिसमें मन को आराम मिलता है।

परंपरा की नई व्याख्या

धार्मिक जानकारों का मानना है कि यह कोई नई परंपरा नहीं, बल्कि शिव तत्व की मूल भावना की ओर वापसी है। भगवान शिव को ध्यान, तपस्या और मौन का प्रतीक माना गया है। ऐसे में साइलेंट भक्ति आधुनिक समय में परंपरा की नई व्याख्या है, जो दिखावे से दूर आंतरिक आस्था पर जोर देती है।

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बदलती आस्था की तस्वीर

महाशिवरात्रि पर बढ़ता साइलेंट भक्ति का चलन यह दिखाता है कि आज के दौर में आस्था सिर्फ बाहरी आयोजन तक सीमित नहीं रह गई है। लोग शोर में नहीं, शांति में ईश्वर को खोज रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि समय के साथ भक्ति के तरीके बदल सकते हैं, लेकिन आस्था की गहराई और उद्देश्य वही रहता है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 30 January 2026, 1:06 PM IST

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